द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के परिवहन मंत्री और चाईबासा विधायक दीपक बिरुआ को खोजने के लिए गुरुवार को आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग घाटशिला पहुंचे। दर्जनों वाहनों के काफिले के साथ आए लोगों ने घाटशिला के विभिन्न गांवों में मंत्री की तलाश की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से मंत्री के ठिकाने की जानकारी ली और उनकी कार्यप्रणाली पर चर्चा की। ग्रामीणों को बताया गया कि चाईबासा के लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन मंत्री दीपक बिरुआ क्षेत्रवासियों से नहीं मिलते और न ही उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं। लोगों ने कहा कि मंत्री की लगातार अनुपस्थिति से जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आदिवासी समाज के लोगों ने बताया कि चाईबासा बायपास में मंत्री दीपक बिरुआ के कारण “नो-एंट्री” नियम लागू नहीं किया जा रहा है। इसके चलते आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। आरोप लगाया गया कि मंत्री इस गंभीर समस्या पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोगों ने कहा कि मंत्री दीपक बिरुआ से जनता को सतर्क रहना चाहिए।
घाटशिला के कोर्ट परिसर के पास आदिवासी समाज की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने दीपक बिरुआ को “नालायक मंत्री” बताते हुए उन्हें मंत्रीमंडल से बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी जगह किसी अन्य आदिवासी विधायक को मंत्री बनाया जाए ताकि आदिवासी समाज का वास्तविक विकास हो सके। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मंत्री को खोजने के क्रम में उन्हें जेएमएम कार्यकर्ताओं और पुलिस की ओर से कई जगहों पर रोका गया तथा धमकाया भी गया। बावजूद इसके खोज अभियान जारी रहेगा। इस अभियान में मानकी मुंडा संघ के पदाधिकारी, हो महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष बामिया बारी, सेवानिवृत्त संगठन के अध्यक्ष रामाय पूर्ति, सचिव चंद्रमोहन बिरुआ, मुखिया संघ के अध्यक्ष हरिन तामसोय, वरीय उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र बोईपाई, ईचा-खरखाई बांध संघ के सचिव सुरेश सोय, साधु बानरा, रियांस सामद समेत विभिन्न आदिवासी संगठनों के सैकड़ों लोग शामिल रहे।
आदिवासी समाज के लोग हाथों में तख्तियाँ लिए मंत्री की तलाश करते नजर आए। तख्तियों पर लिखा था
“लापता विधायक दीपक बिरुआ की खोज में”
“लापता परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ की खोज में”
“लापता मंत्री-विधायक को खोजने वाले व्यक्ति को उचित इनाम”
“मंत्री दीपक बिरुआ से सतर्क रहें”
