पलामू
पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने पलामू क्षेत्र से जु़ड़े मुद्दे राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पलामू का पैसा कहीं और खर्च किया जा रहा है, जिससे दूसरे क्षेत्रों को फायदा हो रहा है, जबकि पलामू के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. उनके अनुसार, इस वजह से पलामू के युवाओं और यहां के प्राकृतिक संसाधनों की लगातार अनदेखी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में स्थानीय भाषा का मुद्दा विशेष रूप से नौकरी और शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं, जैसे JTET, में बहुत महत्वपूर्ण है. पलामू क्षेत्र में कौन-कौन सी भाषाएं स्थानीय मानी जाती हैं, इस पर स्पष्टता होना जरूरी है.
मुद्दा केवल भाषा का नहीं, पलामू के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा: भानु
भानु प्रताप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द ही पलामू के हितों को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान कोयला और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं को भी बंद कराया जाएगा और सरकार को इस बात के लिए मजबूर किया जाएगा कि वह पलामू के साथ हो रहे कथित अन्याय को समाप्त करे. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मुद्दा केवल भाषा का नहीं है, बल्कि पलामू के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा हुआ मामला है. उनके अनुसार, झारखंड की अपनी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाएं हैं, जिन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन सरकार द्वारा बाहरी भाषाओं को शामिल करने से स्थानीय युवाओं के हितों की अनदेखी हो रही है.

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार: भानु
भानु प्रताप ने झारखंड सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. उन्होंने मांग की कि JTET परीक्षा में झारखंड की स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाए और सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे.