logo

5 ट्रिलियन की इकोनॉमी में जीरो पूछने वाले गौरव वल्लभ राज्यसभा के गणित में खा गए मात, बीजेपी ने दिल तोड़ा!

a2230.jpg

सूरज ठाकुर/रांची:

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य गौरव वल्लभ को अब आंकड़ों का गणित समझ में गया होगा। गौरव वल्लभ अब बखूबी समझ गए होंगे कि सियासी गणित में आंकड़ों की कितनी, कब और किसको दरकार होती है। 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी में जीरो का महत्व समझाने वाले गौरव वल्लभ अब जानते हैं कि संसद के उच्च सदन में दस्तक देने के लिए सियासी गणित में आंकड़ों का समायोजन कैसे किया जाता है। वहां अर्थव्यवस्था थी और यह राजनीतिक व्यवस्था है। अब गौरव वल्लभ को इल्म हुआ होगा कि यहां अंकों का आकलन करके बिसात कैसे बिछाई जाती है। 

दरअसल, 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी में जीरो गिनाने से लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य बनने के बाद भी सियासी गणित के आंकड़े कुछ ऐसे दिमाग में उथल-पुथल मचा देंगे, गौरव वल्लभ ने सोचा भी नहीं होगा। किताबों से हासिल आंकड़ों का अहंकार अब सियासी रण में चकनाचूर हुआ है। 

गौरव वल्लभ की मौजूदा हालत में केवल यही कहा जा सकता है कि बड़े बेआबरु होकर हम तेरे कूचे से निकले। सियासी बिसात पर मात खाने के बाद भी जब कोई मीडिया को ही शुभकामना देने लग जाए तो समझ जाना चाहिए कि झटका कितना तगड़ा लगा है। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब गौरव वल्लभ को झारखंड में झटका मिला है। गौरव वल्लभ के सियासी जीवन में झटकों का इतिहास रहा है। बस पार्टी बदल गई है। पहले कांग्रेस ने झटका था और अब भारतीय जनता पार्टी ने वही सलूक किया है। 

सियासी गलियारों  में इसी बात की चर्चा है कि आखिर गौरव वल्लभ से भारतीय जनता पार्टी ने किस जनम का बदला लिया है। उन्हें किस गुनाह की सजा दी है। भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड से राज्यसभा जाने का ख्वाब लिए बैठे गौरव वल्लभ को झटका ही नहीं दिया बल्कि तड़पाया है। बताइये ना कि ऐसा कौन करता है। राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे, इस पर भारतीय जनता पार्टी से भी ज्यादा कॉन्फिडेंट गौरव वल्लभ थे। तभी तो भाजपा उम्मीदवार की घोषणा करने से बचती रही और गौरव वल्लभ नामांकन पत्र खरीद चुके थे। उम्मीद थी कि इधर, भाजपा ने नाम पर मुहर लगाई और उधर मैं पर्चा दाखिल कर दूंगा।

अब जबकि बाबूलाल मरांडी, आदित्य साहू और अमर बाउरी से लेकर झारखंड भाजपा के तमाम बड़े नेता आश्वस्त थे, गौरव वल्लभ आत्मविश्वास से लबरेज थे, लेकिन यह क्या। भाजपा ने तो यह कहकर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को समर्थन दे दिया कि हम आंकड़ों का जोड़-तोड़ नहीं समझते। 

कहीं यह गौरव वल्लभ के जीरो बताने का बदला तो नहीं था। दरअसल, गौरव वल्लभ जब कांग्रेस में थे तो भरी सभा में बीजेपी की बेइज्जती ट्रिलियन इकोनॉमी में जीरो पूछकर कर चुके थे। लगता है आज वही जीरो भारी पड़ा है। 

गौरव वल्लभ का जीरो पूछने का अंजाम उनके सियासी आंकाक्षाओं को शून्य कर देने के रूप में सामने आएगा, यह किसने सोचा था। 

लगता है कि इकोनॉमी के जटिल आंकड़ों को आसानी से समझ जाने वाले गौरव वल्लभ सियासी गणित नहीं समझ सके। आर्थिक मसलों पर प्रधानमंत्री को सलाह देने वाले गौरव वल्लभ नहीं समझ सके कि राज्यसभा के ख्वाब में भी आंकड़ों की पेचीदगी सुलझानी होती है। आंकड़ों का सटीक इक्वेशन बिठाना होता है। सियासी मैथेमेटिक्स का अपना अलग फॉर्मूला है। गौरव वल्लभ समझ जाते तो यूं नामांकन पत्र हाथ में लेकर झेंपना नहीं पड़ता। इसलिए कहते हैं कि सिलेबस के बाहर की दुनिया को पढ़ना जरूरी है। अन्यथा भारी झटका लगता है।

Tags - Gaurav VallabhRajya Sabha ElectionJharkhandBJP