जीतेंद्र कुमार
आप छात्र आंदोलन में जरूर उलझे होंगे। जेपीएसस और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार के विश्लेषण में लगे होंगे। छात्र आंदोलन का आकलन कर रहे होंगे। लेकिन मेरी नजर तो राज्य के विकास पर है। झारखंड के विकास पर। स्वास्थ्य पर। सड़क पर। फ्लाई ओवर पर। हम तो झारखंड का विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। आधारभूत संरचनाओं का विकास होगा तो झारखंड का विकास होगा। झारखंड का विकास होगा तो यहां के लोगों की माली हालत बदलेगी। नीचले पायदान पर बैठे लोग विकास की मुख्य धारा से जुड़ेंगे। इसलिए इस काम पर हम ज्यादा ही ध्यान दे रहे हैं। जी, कुछ ज्यादा ही। क्योंकि मेरे लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी है।

हम तो कांके साइड में एक बड़ा हॉस्पीटल बनवाने में लगे हैं। ऐसा हॉस्पीटल की हमारी आर्थिक कमजोरी को सदा के लिए दूर कर दे। उस हॉस्पीटल के निर्माण से इतना बिटामिन मिले कि हर तरह के रोग दूर हो जाएं। इसी तरह इतना फ्लाइ ओवर बनवाने में लगे हैं कि राजधानी का जाम छू मंदर हो जाए। राजधानी रांची के लोग मुंबई-पुणे हाई-वे का आनंद लें। लेकिन इतने बड़े को काम के लिए काम भी बड़ा करना पड़ता है। बड़े काम के लिए मेहनत के साथ साथ तिकड़म भी बड़ा करना पड़ता है। इसलिए हम तो अभी इसी में लगे हैं। ऐसा तिकड़कम कि मेरा भी बड़ा काम हो जाए और नाम भी आसमान छू जाए।
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अब तो आप समझ ही रहे होंगे। बड़े काम को अपने ही लोगों से कराने पर ज्यादा भरोसा होता है। उसी पर विश्वास करना पड़ता है। इसलिए हम अब सेट करने में लगे हैं कि इतना बड़ा बड़ा काम अपने खास लोगों को मिल जाए। बहुत हद तक हम इसमें सफल भी हो गए हैं। टेंडर निकल गया है। हम सेटिंग कर रहे हैं। चाह रहे हैं कि फ्लाई ओवर तो अग्रवाल साहब को मिल जाए। हॉस्पीटल के लिए केएमबी का नाम पहले से तय है। भाई आपको जो भी लगे, लेकिन यह कंपनी तो हमारे लिए पूरी तरह विश्वसनीय है। क्योंकि रांची में ही कई काम कर दिखाया है। माननियों का बसेरा बनाने में एल-वन हुई कंपनी को हड़काकर काम लेने का दबदबा दिखा चुका है। फिर भला अब उसे अपना दबदबा दिखाने की जरूरत ही कहां है। लेकिन खेल पर खिलाड़ियों की पूरी नजर है। मदारी मैदान से बाहर रह कर टेंडर के टेंपरिंग को समझ रहे हैं। इस क्रम में हम भी कुछ कुछ समझ गए हैं। आगे भी समझने की पढ़ाई कर रहे हैं।
