जीतेंद्र कुमार
टेक्निक सब जगह काम आता है। मशीन चलाना हो या सरकार। टेक्निक का उपयोग बहुत जरुरी होता है। आधुनिक युग में इसके प्रभाव और उपयोग से कोई इंकार भी नहीं करता। सभी जानते हैं कि आगे बढ़ना है तो किसी को पीछे ढकेलना भी है। इसमें भी तकनीक का उपयोग करना है। हो भी रहा है। सचिवालय में इस टेक्निक की चर्चा आज कल खूब हो रही है। वित्त विभाग में जाने पर इस तकनीक को लेकर कुछ ज्यादा ही चर्चा है। फिर चर्चा उनके बीच भी खूब है जिन्हें सरकार से भुगतान लेना है। टेंडर-सप्लाई का पैसा पाना है। अब सचिवालय और उसमें भी वित्त विभाग के लोगों की सुनें तो वे फुसफुसा कर बता भी रहे हैं। वे चुपके से कान में कह रहे हैं। भाई साहब ट्रेजरी का सर्वर डाउन हो नहीं रहा है। डाउन कर दिया जा रहा है।

फिर वे बताने लगते हैं। किसी किसी दिन सरकार के कोष की स्थिति बहुत खराब हो जा र ही है। इतने कम पैसे रह जा रहे हैं कि भुगतान के लिए बड़ी रकम का चेक या ऑर्डर कोषागार में पहुंच जाये तो लाल बत्ती जल सकती है। बताते हैं कि पिछले दिनों कुछ यही स्थिति हो गयी थी। सरकार के चेस्ट में इतने कम पैसे रह गये थे कि शीर्ष स्तर तक बेचैनी बढ़ गयी। आनन-फानन में तकनीक का सहारा लिया गया। झारखंड में इंटीग्रेटेड फंड मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के सर्वर के वार्षिक रखरखाव और सिस्टम उन्नयन के कारण 16 और 17 नवंबर, 2025 को कोषागार से भुगतान बंद कर दिया गया। इस वजह से, सरकारी भुगतान और बिल पास करने जैसी वित्तीय सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई। पेंशन का भुगतान भी रुक गया।

सरकार के जानकार बताते हैं कि जब विभिन्न मदों से सरकार के कोष में पैसा आया। सरकार भुगतान करने के लिए सामान्य स्थिति में आयी। तब फिर से सर्वर को चालू किया गया। भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गयी। लेकिन अभी भी सरकार सामान्य स्थिति में नहीं आयी है। लगातार आरबीआई से प्राप्त होने वाले आंकड़े पर नजर रखी जा रही है। इस पर सरकार पैनी नजर बनाये रख रही है। लाल बत्ती जलने से सरकार की बिगड़ने वाली छवि का भी ध्यान रखा जा रहा है। साथ साथ सरकार के राजस्व बढ़ाने को लेकर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए तरकीब ढूंढने पर भी जबरदस्त मंथन जारी है।
