द फॉलोअप डेस्क
सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्तूबर को हुई सुनवाई के बाद झारखंड सरकार एक बार फिर राज्य सूचना आयोग में रिक्त मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सक्रिय हो गयी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर मुख्य सूचना आयुक्त के एक और सूचना आयुक्त के छह पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन आमंत्रित किया है। इच्छुक व्यक्ति 26 नवंबर तक कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग प्रोजेक्ट भवन रांची में अपना आवेदन स्पीड पोस्ट या निबंधित डाक से भेज सकते हैं। विज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि 29 जून 2024 के आदेश के आलोक में आमंत्रित विज्ञापन के आधार पर आवेदन करनेवालों को इस बार आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि 2024 के विज्ञापन के आधार पर आवेदन करने वाले व्यक्ति की अगर उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है तो उनके आवेदन पर विचार नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार 27 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय सूचना आयोग सहित विभिन्न राज्यों में सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को लेकर सुनवाई हुई। आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के क्रम में झारखंड सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को 45 दिनों के भीतर राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्तों के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर लेने का आश्वासन दिया। इस तरह 11 दिसंबर से पूर्व झारखंड सरकार को नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर लेना अनिवार्य होगा। अन्यथा सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कड़ा आदेश दे सकता है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद ही सरकार ने फिर से नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी दिखायी है।

यहां मालूम हो कि 2020 से राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद रिक्त है। 8 मई 2020 को तत्कालीन प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सूचना आयोग पूरी तरह रिक्त है। पहले प्रतिपक्ष का नेता नहीं रहने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया बाधित रही। जब अमर कुमार बाउरी प्रतिपक्ष के नेता बने तो प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन अंतिम फलाफल नहीं निकला। उसके बाद भाजपा ने बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष का नेता बनाया। इस पर भी विवाद बढ़ा। स्पीकर ने बाबूलाल मरांडी को आधिकारिक रूप से प्रतिपक्ष का नेता मानने से इंकार कर दिया। जब 2024 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी फिर भाजपा की टिकट पर विधायक बने और पार्टी ने उन्हें प्रतिपक्ष का नेता बनाया तो मामला ठंढा हुआ। अब प्रतिपक्ष का नेता भी है और कोई अड़चन भी नहीं। देखना है कि इस बार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होती है कि नहीं। क्योंकि बाबूलाल मरांडी का प्रतिपक्ष का नेता बने कई महीने हो चुके हैं, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही थी।
