द फॉलोअप डेस्क
डीएवी कपिलदेव के पूर्व प्राचार्य मनोज कुमार सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा को निचली अदलात में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिन्हा को मिली जमानत का दुरुपयोग करने की भी बात कही है। साथ ही हाईकोर्ट के रिकार्ड में मौजूद कागजातों का अवलोकन करने के बाद मनोज सिन्हा की याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट के 20 जून 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली मनोज कुमार सिन्हा की याचिका खारिज कर दी है। साथ ही आरोपी की उम्र को देखते हुए ट्रायल का काम जल्द पूरा करने का भी निर्देश दिया।

यहां मालूम हो कि पूर्व प्राचार्य सिन्हा पर अपने ही स्कूल की एक नर्स ने छेड़खानी का आरोप लगाया था। उसके बाद निचली अदालत ने मनोज कुमार सिन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मनोज कुमार सिन्हा को 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गयी। इसके विरुद्ध शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने 20 जून 2025 को जमानत रद्द कर दी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मनोज कुमार सिन्हा के वकील सिद्दार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि आरोप संदेह पर आधारित हैं, ठोस सबूत नहीं। ट्रायल चल रहा है और शिकायतकर्ता की गवाही हो चुकी है। वहीं सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरोप पुष्ट होता है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि धमकी के आरोपों को याचिकाकर्ता से जोड़ने के पर्याप्त सबूत हैं।
.jpeg)