द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया है। झामुमो ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के बावजूद बाबूलाल मरांडी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की बात करते हैं, और ऐसे में भाजपा द्वारा बड़े पैमाने पर विधायकों को आर्थिक प्रलोभन, अनैतिक बाह्य दबाव और भयादोहन के जरिए अपने पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
झामुमो ने कहा कि झारखंड विधानसभा में बीजेपी के महज 21 विधायक हैं जबकि राज्यसभा की प्रत्येक सीट के लिए उम्मीदवार को न्यूनतम 28 विधानसभा सदस्यों का पहला वरीयता मिलना जरूरी होता है। बावजूद इसके नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सार्वजनिक तौर पर घोषणा करते हैं कि आगामी 18 जून को राज्यसभा चुनाव में वे अपना उम्मीदवार उतारेंगे।

झामुमो ने चुनाव आयोग से की यह अपील
झामुमो ने चुनाव आयोग से झारखंड में राज्यसभा चुनाव में भ्रष्टाचार और भयमुक्त वातावरण बनाने के लिए सजग होने की अपील की है। कहा है कि ऐसी व्यवस्था बने कि किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त की स्थिति ना बने। झामुमो ने चुनाव आयोग से अपील की है कि वह राज्य में सीबीआई, ईडी, राजस्व खुफिया निदेशालय समेत अन्य एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्तका बरतने का निर्देश देने की अपील की है।

सत्तापक्ष के पास फिलहाल कितने विधायक हैं
झामुमो ने कहा कि हालिया विधानसभा चुनाव में झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक चुने गए। सत्तापक्ष के कुल 56 विधायक हैं। झामुमो ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए प्रस्तावित उम्मीदवारों को 28 विधानसभा सदस्यों का पहला वरीयता मत मिलना जरूरी होता है, और सत्तापक्ष के पास 56 विधायक हैं तो ऐसे में 2 राज्यसभा सदस्यों का चुना जाना तय है। बावजूद इसके बीजेपी का उम्मीदवार उतारने की बात कहना गड़बड़ी की आशंका पैदा करता है।