द फॉलोअप डेस्क
राज्य सरकार को उम्मीद है कि चार दिसंबर को झारखंड हाईकोर्ट में पेसा नियमावली पर होनेवाली सुनवाई के बाद लघु खनिज के टेंडर आवंटन पर लगी रोक हटा ली जाएगी। इसको ध्यान में रखते हुए खान व भूतत्व विभाग ने बालू घाटों के संचालन को लेकर नियमावली को अंतिम रूप दे दिया है। बालू का सरकारी दर निर्धारित कर दिया गया है। राज्य भर में कैटेगरी वन का बालू 100 रुपए प्रति 100 सीएफटी की दर से बेची जाएगी। यह बालू पंचायतों द्वारा बेची जाती है।

खान विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि है कि ग्रामीण इलाकों में कैटेगरी वन के बालू घाटों का संचालन झारखंड बालू खनन नियमावली 2025 के अनुरूप किया जाएगा। राज्य के सभी उपायुक्तों को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं। मालूम हो कि पिछले कई वर्षों से राज्य में बालू घाटों का टेंडर नहीं हो सका था। कतिपय विवादों के कारण यह रुका हुआ था। इस वर्ष सरकार पर बड़े दबाव के बाद जिलों में बालू घाटों की निलामी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गयी है। उसके बाद पेसा नियमावली नहीं बनने के कारण हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जबकि 15 अक्तूबर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने भी बालू उत्खनन पर से अपना रोक हटा चुका है।

खान विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ग्राम सभाओं द्वारा 100 सीएफटी बालू की बिक्री की न्यूनतम ईकाई होगी। इससे अधिक दर पर बालू बेचे जाने पर जिला प्रशासन को कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन को बालू खनन और उसकी बिक्री पर नजर रखने के लिए विजिलेंस टीम बनाने का निर्देश दिया गया है। नियमावली में बालू की अवैध बिक्री और ढुलाई पर सख्ती बरतने और इसके जिले जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
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