द फॉलोअप डेस्क
14 वीं जेपीएससी की प्रतियोगिता परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को उम्र सीमा में अतिरिक्त छूट की संभावना अब लगभग समाप्त हो गयी है। मुख्यमंत्री ने बगैर किसी निदेश के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग को मंगलवार की शाम फाइल लौटा दी। फाइल लौटाने के साथ मुख्यमंत्री की ओर से कार्मिक विभाग को कोई नया निदेश नहीं दिया गया है। कैबिनेट की स्वीकृति के लिए गयी फाइल पर सिर्फ स्थगित शब्द की टिप्पणी की गयी है। इस तरह उम्र सीमा में छूट देने की संभावना क्षीण हो गयी है। जेपीएससी 14 वीं का फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 14 फरवरी है। अगले कुछ दिनों में कैबिनेट की बैठक भी नहीं होने वाली है। इसलिए मामला उलझ गया है और उम्र सीमा में छूट की उम्मीद खत्म हो गयी है।
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उम्र सीमा में छूट देने के लिए अब क्या थी प्रक्रिया
मालूम हो कि 14 वीं जेपीएससी की परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को उम्र सीमा में छूट देने का कार्मिक ने प्रस्ताव दिया था। उस प्रस्ताव में कट ऑफ डेट एक अगस्त 2023 दिया गया था। जबकि 14 वीं जेपीएससी के विज्ञापन में इस बार उम्र सीमा में कोई छूट नहीं दी गयी थी। कट ऑफ डेट एक अगस्त 2026 तय किया गया है। कार्मिक के प्रस्ताव पर कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ने इस विषय को स्थगित रखने का आदेश दिया था। उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि सरकार नये सिरे से उम्र सीमा में कुछ और छूट दे सकती है। इसके लिए फिर से आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था। नियमानुसार जब कोई विषय कैबिनेट के द्वारा स्थगित कर दी जाती है तो संबंधित विभाग विभागीय मंत्री के निर्देश पर फिर से प्रस्ताव तैयार करता है। यहां भी जब कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया तो फिर से उम्र सीमा में छूट देने के लिए कार्मिक को प्रस्ताव तैयार करना था। इसके लिए मुख्यमंत्री का आदेश अनिवार्य था। लेकिन मुख्यमंत्री ने स्थगित हुई संचिका को बगैर किसी निदेश के कार्मिक को लौटा दिया। इस तरह नये सिरे से प्रस्ताव तैयार करने का विषय फिलहाल समाप्त हो गया है।

कई कारक छात्रों के विरुद्ध गए
जानकार सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कट ऑफ डेट में छात्रों को कुछ छूट देना चाहते थे। इसी कारण सरकार के संकेत पर ही कार्मिक ने उम्र सीमा में तीन साल की छूट देने का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए कट ऑफ डेट एक अगस्त 2023 करने का प्रस्ताव दिया था। मुख्यमंत्री की एज में छूट देने की मंशा इससे भी स्पष्ट होती है कि पांच फरवरी को कैबिनेट की बैठक से पहले वह कोडरमा गए थे। वहां सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने एज रिलैक्सेशन पर विचार करने की बात भी कही थी। लेकिन कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री का माइंड सेट बदल गया। बताया जाता है कि छात्रों का आंदोलनरत रहना और राज्यपाल से मिलना मुख्यमंत्री काफी नागबार गुजरा। सरकार के शीर्ष स्तर पर मानना था कि जेपीएससी की वैकेंसी 2023 और 2024 की है। इसलिए कटऑफ डेट अगस्त 2023 करने का प्रस्ताव व्यवहारिक है। जबकि अधिकारियों और कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का मानना था कि अब उम्र सीमा में छूट नहीं दी जानी चाहिए। विकलांग उम्मीदवारों के लिए पहले से ही 45 वर्ष तक की उम्र सीमा तय है। पांच साल और छूट मिलने पर कोई अभ्यर्थी 50 वर्ष की आयु में परीक्षा में बैठेगा। अगर परीक्षा में सफल हुआ तो सेवा में आते आते उसकी उम्र 51-52 वर्ष हो जाएगी। इस तरह वह मुश्किल से 8-9 साल की ही सेवा दे सकेगा। सरकार में बैठे लोग पहले उम्र सीमा में दी गयी छूट के पीछे कोरोना माहमारी को आधार बनाया था। सरकार का तर्क था कि कोरोना के कारण छात्रों की उम्र सीमा में छूट मिलनी चाहिए। इसी कारण सातवीं से 10 वीं जेपीएससी के लिए कट ऑफ डेट अगस्त 2016 एवं 11 वीं से 13 वीं के लिए अगस्त 2017 किया गया था। इस बार छात्र उसी आधार पर अगस्त 2018 की मांग कर रहे हैं।
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