द फॉलोअप डेस्क
झारखंड की वर्ष 2015 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में 888 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और भर्ती एजेंसी को इन अभ्यर्थियों के मामलों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। मामला उन उम्मीदवारों से जुड़ा है जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दौरान लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा और मेडिकल जांच जैसी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं। इसके बावजूद अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आ पाया था, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने राज्य सरकार को दिया निर्देश
अभ्यर्थियों का कहना था कि भर्ती के दौरान कुछ आरक्षित श्रेणियों की कई सीटें खाली रह गई थीं, जिन्हें नियमों के अनुसार अन्य योग्य उम्मीदवारों से भरा जा सकता था। इसी आधार पर उन्होंने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की लेकिन राहत नहीं मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इतने लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की दावेदारी पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में आवश्यक छूट दी जाए ताकि वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

अब सबकी नजर राज्य सरकार पर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अभ्यर्थियों का फिर से शारीरिक और मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। उम्र बढ़ने के कारण जिन मानकों पर असर पड़ सकता है, वहां उचित रियायत दी जा सकती है लेकिन अन्य आवश्यक मानकों में कोई छूट नहीं होगी। यदि अभ्यर्थी नई प्रक्रिया में सफल पाए जाते हैं तो उन्हें कांस्टेबल पद पर नियुक्ति दी जा सकती है।
हालांकि उनकी वरिष्ठता वर्तमान में कार्यरत कांस्टेबलों के बाद रखी जाएगी, जबकि आपसी वरिष्ठता पुरानी मेरिट सूची के आधार पर तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से वर्षों से नियुक्ति की मांग कर रहे 888 अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।