द फॉलोअप, रांची
झारखंड प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनने के बाद प्रो आदित्य साहु शनैः शनैः लेकिन प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा करने में सफल रहे। काफी मशक्कत के बाद प्रवक्ताओं, प्रभारियों और विभिन्न मीडिया सेलों का भी गठन कर दिया। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के लिए अब प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा काफी मुश्किल बताया जा रहा है। एक अनार और सौ बीमार वाली स्थिति के कारण प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा नाराजगी मोल लेने जैसा हो गया है। इसलिए कि भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने इस बार पार्टी संविधान के अनुरूप प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा का सख्त निर्देश दिया है।
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जानकारी के अनुसार पूर्व में सबको एडजस्ट करने के उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष 150-200 नेताओं-कार्यकर्ताओं को प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना डालते थे। पार्टी संविधान का अनुपालन करने की अनिवार्य बाध्यता नहीं रहने की वजह से, इसमें सभी समाहित हो जाया करते थे। हालांकि पूर्व के कुछ अध्यक्षों ने प्रदेश कार्यसमिति की आधिकारिक घोषणा भी नहीं की। लेकिन अब पार्टी संविधान का अनुपालन करने की बाध्यता के कारण प्रदेश पदाधिकारी और कार्यसमिति सदस्यों की अधिकतम संख्या 90 हो सकती है।

जानकार बताते हैं कि प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा हो चुकी है। उसमें पदाधिकारी व अन्य सदस्यों को मिला कर कुल 24 नेताओं के नाम शामिल हैं। इस तरह 66 पद ही रिक्त हैं। इसमें पार्टी संविधान के अनुसार 33 फीसदी महिलाओं को स्थान देना है। इस तरह प्रदेश कार्यसमिति में 22 महिलाएं रखी जानी है। जिसके बाद केवल 44 पद रिक्त रह जाते हैं, जिस पर पुरुष नेताओं और कार्यकर्ताओं को रखा जा सकता है। सांगठनिक दृष्टि से झारखंड में भाजपा के 30 जिला हैं। अगर प्रत्येक जिला से एक-एक कार्यसमिति सदस्य बनाया जाता है, तो प्रदेश कार्यसमिति के 14 पद बचते हैं, जिस पर वैसे नेताओं को रखना प्रदेश अध्यक्ष के लिए मजबूरी बन रही है जो प्रभाव, व्यक्तित्व और पार्टी के प्रति उनके समर्पण के कारण पद देना मजबूरी दिखता है। इस तरह वैसे नेताओं को शामिल करने को लेकर परेशानी खड़ी हो रही है जो गणेश परिक्रमा करते रहते हैं या पैरवी पुत्र हैं। रांची, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, कुछ ऐसे जिले हैं जहां से पहले दर्जनों प्रदेश कार्यसमति सदस्य बनते थे। इस उधेड़ बुन में प्रदेश अध्यक्ष बुरी तरह फंस गए हैं। इस कारण प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा में भी विलंब हो रहा है।
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