द फॉलोअप, रांची
राज्य सरकार ने विभागीय प्रोन्नति समिति के गठन हेतु कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के संकल्प (6147 दिनांक 7 नवंब 2003) को संशोधित कर दिया है। इसी संकल्प के अनुसार राज्यकर्मियों की प्रोन्नति के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक होती रही है। राज्यकर्मियों को प्रोन्नति दी जाती रही है। संकल्प के अनुसार अगर ऊपर के पद रिक्त हैं और रोस्टर क्लियरेंस मिल चुका है तो किसी भी दिन संबंधित कर्मी या अधिकारी को प्रोन्नति समिति की बैठक बुलाकर प्रोन्नति दी जाती रही है। लेकिन राज्य सरकार द्वारा उपरोक्त संकल्प में पिछले दिनों कैबिनेट की स्वीकृति के माध्यम से संशोधन कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद अब प्रोन्नति समिति की बैठक वर्ष में केवल जून और जुलाई माह में ही होगी। इससेअगस्त से मई के बीच रिटायर करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल सकेगा।

कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने 2003 के संकल्प को संशोधित करने के पीछे कई तर्क दिए हैं। पहला, यह कहना है कि पूर्व के संकल्प में विभागीय प्रोन्नति समिति की वर्ष में कितनी बार बैठक होगी, यह स्पष्ट नहीं है। इस कारण विभिन्न सेवा और संवर्ग के कर्मियों की प्रोन्नति संबंधी कार्रवाई लंबित रहती है। इससे न्यायालीय वादों में अनावश्यक रूप से वृद्धि होती है। इसलिए प्रोन्नति समिति की बैठक बुलाने के लिए एक समान व्यवस्था की जरूरत है।

कार्मिक प्रोन्नति को राज्यकर्मियों के पेशेवर विकास, मनोबल एवं कार्य कुशलता में वृद्धि के लिए आवश्यक भी मानता है। लेकिन अब समस्या यह है कि विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक वर्ष में केवल जून और जुलाई माह में ही होगी। अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी अगस्त से मई के बीच रिटायर करता है तो उसे प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल सकेगा। जबकि किसी भी कर्मी के लिए रिटायरमेंट से पूर्व मिलनेवाली देय प्रोन्नति काफी महत्व रखता है। उसी प्रोन्नत पद के वेतनमान के अनुसार उसका पेंशन व अन्य देय लाभ तय होता है, जो उसके शेष बचे जीवन में काफी अहम स्थान रखता है।
