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झारखंड में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन नियमों में बदलाव, अब करना होगा 4 साल का इंतजार; पढ़े पूरी खबर

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रांची
झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों के प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए एक नया संशोधित संकल्प जारी किया है, जिसे 2 जुलाई को कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। नए नियम के तहत अब प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि और प्रमोशन के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा अवधि की गिनती एक साथ न होकर अलग-अलग की जाएगी; यानी 2 साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा होने के बाद ही प्रमोशन के समय की उलटी गिनती शुरू होगी, जिससे कर्मचारियों को पहली प्रमोशन के लिए अब 4 साल का इंतजार करना होगा। सरकार ने इस प्रशासनिक विसंगति को दूर करने के लिए नियमों में यह संशोधन किया है, जो उन विभागों में लागू होगा जहां पहले से कोई अलग व्यवस्था नहीं है। हालांकि, झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है और 12 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव को असमानता बढ़ाने वाला बताते हुए इस संशोधित संकल्प को तुरंत रद्द करने की मांग की है।अब अलग-अलग मानी जाएंगी दोनों अवधियां
सरकार के संशोधित संकल्प के अनुसार, जिन मूल पदों पर 2 वर्ष की प्रोबेशन अवधि तय है और अगले पद पर प्रमोशन के लिए 2 या 3 वर्ष की सेवा अनिवार्य है, वहां अब इन दोनों अवधियों को एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग गिना जाएगा। कर्मचारी को पहले अपने 2 साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा करना होगा, और इसके खत्म होने के बाद ही प्रमोशन के लिए तय सेवा अवधि की उलटी गिनती शुरू होगी। पहली प्रमोशन के लिए अब करना होगा 4 साल का इंतजार
नए प्रावधानों को एक उदाहरण से समझें अगर यदि किसी कर्मचारी का मूल पद 4800 रुपए ग्रेड पे का है और उसका पहला प्रमोशन 5400 रुपए ग्रेड पे वाले पद पर होना है, जहां प्रमोशन के लिए 2 वर्ष की सेवा अवधि और मूल पद पर 2 वर्ष का प्रोबेशन निर्धारित है, तो अब उस कर्मचारी को पहली प्रमोशन पाने के लिए कुल 4 वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। पहले 2 साल प्रोबेशन में निकलेंगे और उसके बाद के 2 साल की सेवा पूरी करने पर ही वह प्रमोशन का हकदार होगा। सरकार ने क्यों किया नियमों में संशोधन?
राज्य सरकार ने इस संशोधन की वजह बताते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई विभागों और सेवाओं में प्रोबेशन अवधि और प्रमोशन के लिए तय सेवा अवधि लगभग एक साथ ही पूरी हो रही थी। प्रशासनिक दृष्टिकोण से इसे सही नहीं माना गया। इसी कमी को दूर करने और व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नियमों में यह बदलाव किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि जिन ग्रेड पे के बीच प्रमोशन की अवधि वर्ष 2014 के संकल्प में तय नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि को जोड़कर पात्रता तय की जाएगी। इसके अलावा, जिन सेवा नियमावलियों में पहले से ही प्रमोशन की कोई अलग व्यवस्था मौजूद है, वहां पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। लेकिन जिन सेवाओं में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, वहां वर्ष 2014 के इस संशोधित संकल्प के नए प्रावधान ही लागू होंगे। सचिवालय सेवा संघ ने खोला मोर्चा, बदलाव का विरोध
सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने इस नए नियम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है और इस संशोधित संकल्प को तुरंत रद्द करने की मांग की है। संघ का तर्क है कि साल 2014 में जारी संकल्प संख्या-3286 का मुख्य उद्देश्य सभी सेवा संवर्गों में प्रमोशन की अवधि में समानता लाना था, लेकिन इस नए संशोधन से वह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होगी और विभागों के बीच फिर से असमानता पैदा हो जाएगी। 12 साल बाद इस बदलाव की क्या जरूरत थी?
सचिवालय सेवा संघ ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जो व्यवस्था साल 2014 से सुचारू रूप से चल रही थी, उसमें 12 साल बाद अचानक बदलाव करने की क्या आवश्यकता थी? संघ के मुताबिक, इस नए नियम के लागू होने से जहां अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को लेवल-7 से लेवल-8 में जाने के लिए सिर्फ 2 साल का इंतजार करना होगा, वहीं झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को इसके लिए 8 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस नए नियम पर तुरंत रोक लगाई जाए और पुरानी व्यवस्था को ही बहाल रखा जाए ताकि सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार हो सके।

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