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झारखंड के 10.50 लाख बुजुर्ग–दिव्यांग पेंशनभोगियों के खाते में 15 जुलाई तक आयेगा पैसा

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के 10.50 लाख बुजुर्ग-दिव्यांग पेंशनभोगियों के खाते में 15 जुलाई तक पैसा आयेगा। दरअसल राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभुकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में पेंशन और अन्य सहायता राशि के भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना और राष्ट्रीय परिवार हित लाभ योजना के लाभार्थियों के खातों में अब तक राशि नहीं पहुंच सकी है। विभाग के अनुसार, भुगतान में हो रही इस देरी का मुख्य कारण नई डिजिटल भुगतान प्रणाली एसएनए-स्पर्श (SNA-SPARSH) का क्रियान्वयन है।


नई भुगतान प्रणाली लागू होने से अटका भुगतान
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 से केंद्र प्रायोजित योजनाओं का भुगतान भारत सरकार की नई एसएनए-स्पर्श प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत पहले सभी लाभुकों का डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) और वार्षिक सत्यापन पूरा किया जाना अनिवार्य है। यही वजह है कि भुगतान प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। विभाग ने बताया कि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के तहत प्रत्येक लाभुक को हर महीने 1000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों की हिस्सेदारी होती है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लाभुकों को एसएनए-स्पर्श प्रणाली से जोड़ने (इंटीग्रेशन) का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल सिस्टम की टेस्टिंग प्रक्रिया शेष है। विभाग का दावा है कि अगले 15 दिनों के भीतर टेस्टिंग पूरी कर भुगतान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद लाभुकों के खातों में लंबित राशि भेजी जाएगी और उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।


क्या है SNA-SPARSH व्यवस्था?
एसएनए-स्पर्श (समायोजित प्रणाली एकीकृत शीघ्र हस्तांतरण) केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं के फंड ट्रांसफर के लिए विकसित एक रियल-टाइम और पारदर्शी डिजिटल भुगतान प्रणाली है। इसे 'जस्ट-इन-टाइम' अवधारणा पर तैयार किया गया है। पुरानी व्यवस्था में भुगतान के लिए पहले राशि निकालकर रखने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जबकि नई प्रणाली में केंद्र सरकार से राज्य सरकार और फिर आरबीआई व ट्रेजरी के माध्यम से राशि सीधे आवश्यकता के समय अंतिम लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाना है। हालांकि, इसके शुरुआती क्रियान्वयन के दौरान तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण लाभुकों को फिलहाल भुगतान के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

 

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