द फॉलोअप डेस्क
बिहार विधानसभा का चुनाव संपन्न हो चुका है। भाजपा और एनडीए चुनाव परिणाम से गदगद है। उत्साहित है। जोश में है। अब बिहार में भाजपा को नया नेतृत्वकर्ता ढूंढना है। क्योंकि बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ दिलीप जायसवाल को वहां मंत्री बना दिया गया है। उन्हें उद्योग विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है। पार्टी में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत वहां डॉ दिलीप जायसवाला की जगह नये प्रदेश अध्यक्ष के मनोनयन पर विचार विमर्श प्रारंभ होने की सूचना है। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है। वह फिलहाल एक्सटेंशन पर चल रहे हैं। बिहार चुनाव के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया भी रोक दी गयी थी। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए नये सिरे से भाजपा के शीर्ष स्तर विचार विमर्श शुरू कर दिया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की भी घोषणा हो सकती है। उसी क्रम में पड़ोसी राज्य झारखंड में भी नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

यहां मालूम हो कि झारखंड में प्रतिपक्ष के नेता और प्रदेश अध्यक्ष, दोनों की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी निभा रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में राजधनवार से विधायक चुने जाने के बाद भाजपा ने बाबूलाल मरांडी को प्रतिपक्ष के नेता की जिम्मेदारी दी। उसी दिन यह साफ हो गया था कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी नये नेता को बैठाया जाएगा। बीच में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहे रवींद्र राय की जगह प्रो आदित्य प्रसाद साहु को भाजपा ने कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने के समय प्रो साहु को ही अगली दफा प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की जोरदार चर्चा हुई थी।

लेकिन जानकारों का कहना है कि झारखंड में अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किस जाति, समुदाय या वर्ग से होगा, यह बहुत कुछ बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के चयन पर भी निर्भर करेगा। वहां पार्टी पिछड़ा वर्ग और एससी की जगह सवर्ण जाति को तरजीह दे सकती है। उस स्थिति में झारखंड में एससी और पिछड़े वर्ग को मौका मिलने की संभावना बढ़ सकती है। यहां मालूम हो कि झारखंड प्रदेश भाजपा फिलहाल कामचलाऊ व्यवस्था के तहत संचालित है। पिछले एक साल से प्रदेश अध्यक्ष के बदलने की संभावना और कतिपय अन्य कारणों से संगठन गुट गुट में बंटा है। उड़ीसा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के रघुवर दास को भी अभी तक एडजस्ट नहीं किया जा सका है। चुनाव हारने के बाद अर्जुन मुंडा की बनी परिस्थिति में वह भी किनारे खड़े हैं। घाटशिला उप चुनाव हारने के बाद पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की चमक फीकी है। संगठन की इस माली हालत को सुधारना पार्टी के लिए जरूरी बताया जा रहा है। क्योंकि कुछ समय बाद फिर भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएगी।
