द फॉलोअप डेस्कः
एशियन महिला हॉकी चैंपियनशिप ट्रॉफी के आयोजन में हुई गड़बड़ी की जांच को लेकर खेलमंत्री हफीजुल हसन ने आदेश दे दिए हैं। खेल मंत्री ने विभागीय जांच कमेटी गठित करने का पीतपत्र विभाग के सचिव मनोज कुमार को गुरुवार को भेजा है। मंत्री ने कहा कि इस प्रतियोगिता से झारखंड का नाम देश-विदेश में हुआ है। सरकार की ओर से सारी व्यवस्था नियम के दायरे में रहकर की गई है। हालांकि इसमें कुछ वित्तीय अनियमितता की शिकायतें मिली हैं, इसलिए जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है। यदि इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाएगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस संबंध में खेल निदेशक सुशांत गौरव ने कहा कि सारी कार्रवाई नियम के दायरे में रहकर की गई है। जो भी अतिरिक्त खर्च हुए हैं, उनके लिए बकायदा नियम संगत अप्रूवल लिया गया है। ऐसे बड़े आयोजन में कुछ खर्च अचानक होते हैं, इसलिए भी पहले सहमति ली गई थी।

ई-रिक्शा में पेट्रोल भरवाया गया
बता दें कि झारखंड में वर्ष 2023 में एशियन महिला हाकी चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था। इस आयोजन में घोटाले का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि इस आयोजन में चारा घोटाला की तर्ज पर लूट हुआ है। घोटाले का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि खेल निदेशालय ने ई-रिक्शा नंबर जो कि बैट्री से चलती है उसमें 25 लीटर डीजल भरवा दिया। और उसका 2366.23 रुपये का भुगतान भी कर दिया। इसी तरह डिजायर पेट्रोल कार में 40 लीटर डीजल भरवा दिया गया जिसका 3,786 रुपये का भुगतान किया गया।

एक प्लेट में 19 हजार खर्च हुए
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर से पांच नवंबर 2023 तक रांची में आयोजित हुई इस चैंपियनशिप के दौरान तीन नवंबर की रात खेल निदेशालय ने डिनर पार्टी का आयोजन डोरंडा जैप-1 में किया था। इंटरनेशनल हाकी खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित इस पार्टी में 550 वीवीआइपी और वीआइपी शामिल हुए थे। डिनर पर खेल निदेशालय ने एक करोड़ चार लाख रुपये खर्च किए। मतलब खेल निदेशालय ने प्लेट पर करीब 19 हजार रुपये खर्च किए जबकि रांची के रेडिशन ब्लू होटल में वीवीआइपी डिनर पर प्लेट की कीमत 2100 से लेकर 3000 हजार रुपये के बीच है।

एलईडी में भी हुआ घपला
चैंपियनशिप के दौरान मोरहाबादी एस्ट्रोटर्फ हाकी स्टेडियम में एलईडी स्क्रीन लगाने में भी घोटाला सामने आया है। एलईडी स्क्रीन के नाम पर पांच लाख रुपये की चपत सरकार को लगी है। खेल निदेशालय ने जो टेंडर निकाला था, उसमें आठ दिनों के लिए एलईडी स्क्रीन का रेट मांगा गया। अजमानी इंफ्रा ने जो वित्तीय प्रस्ताव दिया उसमें भी आठ दिन का रेट शामिल था। निदेशालय ने जो आर्डर दिया उसमें भी आठ दिन एलईडी स्क्रीन लगाने का जिक्र था। अजमानी इंफ्रा ने जो बिल जमा किया उसके आइटम की सूची में भी आठ दिन साफ-साफ दर्ज है, लेकिन भुगतान में 12 दिन का रेट जोड़ दिया गया। इन चार अतिरिक्त दिनों के एवज में सरकार को पांच लाख की चपत लग गई। प्रतियोगिता में मैचों का आयोजन सात दिन ही हुआ था।