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गुजरात में बेटे की मौत, सिमडेगा में मां अंतिम दर्शन को बेबस, आर्थिक तंगी के बीच प्रशासन ने की शव लाने की व्यवस्था

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द फॉलोअप डेस्क
घर की गरीबी मिटाने के लिए रोजगार की तलाश में गुजरात गया सिमडेगा जिले के लाल गमझरिया निवासी ओमचंद्र मांझी अब सफेद कफन में लिपटकर घर लौटने का इंतजार कर रहा है। जानकारी के अनुसार, तीन सितंबर को उसकी मौत गुजरात राज्य के कच्छ जिले में हो गई थी। घरवालों को इसकी सूचना मिल चुकी थी, लेकिन शव को पैतृक गांव लाने के लिए करीब 1.50 लाख रुपये की जरूरत थी, जो गरीब परिवार के लिए जुटा पाना संभव नहीं था। ओमचंद्र की विधवा मां जसमती देवी पिछले बुधवार से ही बेटे के शव का इंतजार कर रही थीं। रो-रोकर उनकी हालत खराब हो चुकी थी। गांव के लोग रोज़ उनके घर पहुंचकर ढाढ़स बंधाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मां की करुण पुकार सुनकर हर किसी की आंखें नम हो रही थीं।
बताया गया कि ओमचंद्र कुछ माह पूर्व ही काम की तलाश में गुजरात गया था और कच्छ जिले के नाना कपाया मुंद्रा स्थित यश एंटरप्राइज नामक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था। यहीं पर उसकी मौत हो गई। इधर, ओमचंद्र की मां ने झारखंड सरकार, स्थानीय सांसद, विधायक और जिला प्रशासन से बेटे का शव घर लाने की गुहार लगाई थी, ताकि अपने कलेजे के टुकड़े का अंतिम दर्शन कर सके। इस पर संज्ञान लेते हुए सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने शव को गुजरात से लाने की व्यवस्था कराई। ओमचंद्र का शव लेकर उसके रिश्तेदार निजी वाहन से गुजरात से सिमडेगा के लिए रवाना हो चुके हैं। इसके अलावा, श्रम विभाग की ओर से जसमती देवी को त्वरित आर्थिक सहायता के रूप में 50 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए। साथ ही डीसी के निर्देश पर कंपनी मालिक ने अंतिम संस्कार के लिए 35 हजार रुपये की सहायता राशि दी। प्रशासनिक सहयोग और मानवीय पहल के लिए परिजनों ने डीसी कंचन सिंह का आभार जताया है।
वर्ष 2024-25 में जिले के 35 मजदूरों के शव परदेश से लौटे
बता दें कि सिमडेगा जिले के हजारों मजदूर आज भी रोज़गार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। हर साल दर्जनों मजदूर काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन कई बार वे वापस नहीं लौटते। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जिले के 35 मजदूरों के शव परदेश से लौटे हैं। श्रम विभाग ने इन मृतक मजदूरों के परिजनों को मुआवजा राशि सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। हालांकि, कई मामलों में मजदूरों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट आती है, जिनका फिर कोई पता नहीं चलता। यह स्थिति जिले के पलायन की गंभीर सच्चाई को उजागर करती है।



 

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