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सीता सोरेन ने CM हेमंत को लिखी चिट्ठी, JPSC- JSSC में सुधार की मांग कर रहे युवाओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग

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जामताड़ा: 

पूर्व विधायक और भाजपा नेता सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में सुधार की मांग कर रहे युवाओं पर दर्ज मुकदमों को अविलंब वापस लेने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में कहा कि राज्य का भविष्य इन होनहार युवाओं के हाथों में है, इसलिए उन्हें प्रताड़ित करने के बजाय परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाना चाहिए।

​शांतिपूर्ण प्रदर्शन युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार
सीता सोरेन ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि झारखंड के हजारों युवा और अभ्यर्थी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए लंबे समय से सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन छात्रों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी जायज मांगों और शिकायतों को सरकार के समक्ष रखने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सहारा लिया था। युवाओं का यह कदम किसी भी तरह से कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि अपने रोजगार और सुरक्षित भविष्य की रक्षा के लिए एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।

​मुकदमों से बर्बाद हो रहा छात्रों का भविष्य
भाजपा नेत्री ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान कई गंभीर और होनहार छात्रों पर विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। आपराधिक मामले दर्ज होने के कारण इन छात्रों का करियर पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुँच गया है। भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी के सत्यापन (Verification) में इन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि मध्यम और गरीब परिवारों से आने वाले ये छात्र पहले से ही परीक्षाओं में अनियमितताओं और धांधली से जूझ रहे हैं। अब मुकदमों के इस अतिरिक्त बोझ ने छात्रों और उनके परिवारों को गहरे मानसिक अवसाद (Depression) में डाल दिया है।

 

​"युवा राज्य की संपत्ति हैं, अपराधी नहीं"
सीता सोरेन ने सरकार को सलाह दी कि युवा राज्य की संपत्ति हैं, अपराधी नहीं। अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने वाले इन युवाओं के प्रति सरकार को एक अभिभावक की तरह सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि JPSC और JSSC-CGL आंदोलन के दौरान जिन भी परीक्षार्थियों और छात्र नेताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनकी तत्काल समीक्षा की जाए। मानवीय आधार और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग को सभी मुकदमे अविलंब वापस लेने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार झारखंड के युवाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस विषय पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेगी।

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