जीतेंद्र कुमार
हाल में हुए बड़का बाबुओं के ट्रांसफर की चर्चा अब धीरे-धीरे थम रही है। बड़े दिनों बाद एक साथ 15 बड़े बाबू बदले गए थे। कुछ हाशिए से मेन स्ट्रीम में आ गए तो कुछ को थोड़ा सम्मान भी दिया गया। लेकिन एक अधिकारी ऐसे भी रहे जो कभी सत्ता के करीबी समझे जाते थे, दूध की मक्खी की तरह पानी से निकाल कर पर्षद में भेज दिए गए। जानते हैं, क्यों ? क्योंकि साहब वहां निर्णय लेने में, आवंटन देने में डरने लगे थे। फाइल पर बैठ जा रहे थे। फंस जाने की चिंता जता रहे थे। अरे भाई जब विभाग से पैसा रुपी पानी बहेगा ही नहीं तो नीचे के लोगों का गला कैसे तर होगा। उसमें भी गर्मी का समय आने वाला है। पहले से सूखे गले पर अगर भीषण गर्मी का प्रभाव पड़ता तो जान पर ही बनने लगती। इसे भला कैसे बर्दाश्त किया जाता। साहब बदल दिए गए। नये साहब भेज दिए गए। चर्चा है कि अब नया साहब कितना शुद्ध और अशुद्ध पानी पिलाते हैं। इस पर सबकी पैनी नजर बनी हुई है।

लेकिन सरकार के मांई-बाप और विभागीय मंत्री की लाख नाराजगी और नापसंदगी के बावजूद श्री श्री श्री 108 श्री साहब का रुतबा कायम ही रहा। वर्क्स डिपार्टमेंट से हटे तो वर्क्स में ही गए। जानते हैं क्यों, क्योंकि साहब श्री का दक्षिण के एक प्रमुख राज्य के मुख्यमंत्री जी का बरदहस्त प्राप्त है। वह उस मुख्यमंत्री के काफी करीबी और कहिए तो दुलरुआ बताए जाते हैं। अब भला दक्षिण के उस राज्य का मुख्यमंत्री जो भाजपा का विरोधी हो, उसकी पैरवी हो और कोई नहीं सुने, भला ऐसा हो सकता है। भाई राजनीति की दुनियां है। यहां थोड़ा-बहुत तो सबका सुनना ही पड़ता है। मिला-जुला कर चलना ही पड़ता है।
.jpeg)