द फॉलोअप डेस्क
सिमडेगा के रामरेखा धाम में तीन दिवसीय राजकीय रामरेखा महोत्सव सह धार्मिक अनुष्ठान आस्था और श्रद्धा के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। अथाह भीड़ थी, लेकिन अव्यवस्था नहीं; थकान थी, पर शिकायत नहीं; घना अंधेरा था, पर डर नहीं यही इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही। पूरे आयोजन ने मानो रामराज्य की झलक पेश की, जहां हर कोई सहयोगी था और मर्यादा में रहकर भक्ति में लीन था। मेला समाप्त होने के बाद भी प्रभु श्रीराम की नगरी की पवित्रता बनी हुई है। गुरुवार शाम जब भीड़ और वाहनों का शोर शांत हुआ, तब वानर सेना का एक झुंड भी धाम की ओर बढ़ता दिखाई दिया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया।
कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ी। अनुमान है कि चार लाख से अधिक लोग भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए धाम पहुंचे। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच इतने विशाल जनसमूह के बावजूद शांति और अनुशासन बना रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान नहीं, बल्कि भक्ति का तेज झलक रहा था। रात में जब वाहनों की लाइटें पहाड़ की ढलानों पर झिलमिलाईं, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक प्रतीत हुआ। ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरों में धाम और आसपास के क्षेत्र में दूर-दूर तक फैली रोशनी ने मानो पर्वत को दीपोत्सव की भांति प्रकाशित कर दिया। लाखों की भीड़ थी, फिर भी अनुशासन और संयम की मिसाल कायम रही।
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि “रामरेखा धाम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि सिमडेगा की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान है।” उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के लोकमंगलकारी चरित्र की छाप इस धरती के कण-कण में है। बहुभाषिक, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक समाज के लोग इस आयोजन में एकजुटता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले वर्षों में इस धाम को झारखंड के प्रमुख तीर्थ पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। यह महोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि लोकमंगल और सामाजिक एकता का जीवंत संदेश है। इस आयोजन ने सिमडेगा को नई सांस्कृतिक पहचान दी है और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान की है। कुल मिलाकर, कार्तिक पूर्णिमा मेला 2025 भगवान श्रीराम की भक्ति, लोक परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बन गया। यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक आदर्श और प्रेरणा का केंद्र साबित होगा।
