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सिमडेगा में पैसे निकालने आए मनोहर की बैंक की सीढ़ियों में टूटी सांस, बिलखती बेटी का सहारा बने पत्रकार

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अमन मिश्रा/सिमडेगा
सिमडेगा में इंडियन बैंक के बाहर एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। भीड़भाड़ वाले इलाके में एक बेटी अपने अचेत पिता को उठाने की कोशिश करती रही, लेकिन सैकड़ों लोगों के बीच कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। कोनमेंजरा निवासी मनोहर डुंगडुंग, जो पहले ही एक ट्रेन हादसे में अपना एक हाथ गंवा चुके थे और बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे, इलाज के लिए पैसे निकालने इंडियन बैंक शाखा पहुंचे थे। मनोहर डुंगडुंग ने 26 हजार रुपये निकालने के लिए फॉर्म भरा था, लेकिन बैंक का लिंक काफी देर से फेल था। थककर वे अपनी बेटी के साथ बैंक के नीचे सीढ़ियों पर बैठ गए। इसी दौरान उन्होंने पानी मांगा, दो घूंट पिया और थोड़ी देर आराम करने की बात कही। लेकिन यह आराम उनका आखिरी साबित हुआ और कुछ ही देर में उनकी सांसें थम गईं। इस दौरान आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे।


पत्रकारों ने दिखाई संवेदनशीलता
इसी बीच वहां से गुजर रहे सिमडेगा पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष आशीष शास्त्री की नजर बिलखती बेटी पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझा और मदद के लिए आगे आए। कुछ ही देर में फोटोग्राफर राकेश जायसवाल भी मौके पर पहुंचे। आशीष शास्त्री ने तुरंत डॉक्टरों को बुलाया, लेकिन जांच के बाद मनोहर को मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद परिजनों की स्थिति बेहद दयनीय थी। पिता का शव घर ले जाने तक के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। ऐसे में नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक रिंकू और पत्रकार विकास साहू भी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर आर्थिक मदद जुटाई, जिसमें समाजसेवी भरत प्रसाद, इंडियन बैंक प्रबंधन और एक अन्य व्यक्ति ने 5-5 हजार रुपये की सहायता दी। वहीं बैंक प्रबंधक ने भी मानवीय पहल दिखाते हुए 26 हजार रुपये बिना लिंक के ही उपलब्ध करा दिए।


मानवता की मिसाल बने पत्रकार
इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर परिजनों को सौंप दिया। इस पूरी घटना ने जहां एक ओर समाज की संवेदनहीनता को उजागर किया, वहीं सिमडेगा के पत्रकारों ने यह साबित कर दिया कि पत्रकारिता सिर्फ खबर लिखना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के आंसू पोंछना भी है।


 

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