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पलामू में फोर्थ ग्रेड भर्ती पर बवाल, लिखित परीक्षा की मांग को लेकर छात्रों ने कमिश्नर से की मुलाकात

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पलामू 

पलामू जिले में फोर्थ ग्रेड भर्ती प्रक्रिया को लेकर हजारों छात्रों में भारी पीड़ा, आक्रोश और निराशा का माहौल है। छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला के नेतृत्व में उनके सहयोगी साथी अनूप कुमार पासवान, जनेश शर्मा, अनिल बैठा, रविंद्र चंद्रवंशी, संदीप पासवान और बृजेश मेहता ने पलामू कमिश्नर से मुलाकात कर इस भर्ती प्रक्रिया में मैट्रिक अंक आधारित मेरिट सूची पर रोक लगाकर लिखित परीक्षा कराने की मांग की। इस दौरान छात्रों ने कहा कि वर्ष 2010 से 2013 तक मैट्रिक में 50%–55% अंक लाना भी कठिन माना जाता था, जबकि कोविड के बाद 90% से 99% अंक सामान्य हो गए हैं। ऐसे में केवल अंक के आधार पर भर्ती करना गरीब और पुराने अभ्यर्थियों के सपनों के साथ अन्याय है।

बढ़ती उम्र से मानसिक रूप से टूट चुके

वहीं छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले 11 महीनों से छात्र लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कई अभ्यर्थी बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और बढ़ती उम्र से मानसिक रूप से टूट चुके हैं। कई छात्रों की शादी तक रुक गई है और बूढ़े मां-बाप अपने बच्चों की नौकरी की उम्मीद में हर दिन चिंता में जी रहे हैं। पलामू जिले में लगभग 585 सीटों पर यदि निष्पक्ष भर्ती होती है तो सैकड़ों परिवारों का जीवन बदल सकता है। एक चपरासी की नौकरी भी गरीब परिवार के लिए सम्मान, सहारा और भविष्य की नई उम्मीद होती है। इसी सहारे किसी गरीब का बेटा डॉक्टर, इंजीनियर या साइंटिस्ट बनता है।

सामूहिक मुंडन कराने का संकल्प

छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला ने पलामू डीसी एवं प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए और जल्द लिखित परीक्षा की घोषणा की जाए। यदि छात्रों की मांग पूरी नहीं हुई तो पलामू समाहरणालय के समीप हजारों छात्र सामूहिक मुंडन कराने का संकल्प ले चुके हैं तथा आगे और भी कठोर निर्णय लेने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। छात्रों की एकमात्र मांग है कि फोर्थ ग्रेड भर्ती में निष्पक्ष तरीके से लिखित परीक्षा लेकर मेरिट जारी की जाए ताकि हर गरीब और मेहनती छात्र को समान अवसर मिल सके।

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