द फॉलोअप डेस्क, रांची
छात्रों के डेलीगेशन पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की द्वारा दिए विवादित बयान का उन्होंने खंडन किया है। रांची में प्रेस वार्ता कर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। हाल ही में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से उनके बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी गई थी।
उन्होंने कहा कि छात्र नेता रविंद्र पासवान शायद उनके बयान का सही अर्थ नहीं समझ पाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 तारीख को उन्होंने जो बात मीडिया के सामने रखी थी उसका सीधा संबंध सदर अस्पताल में घायल अनशनकारियों से हुई मुलाकात और वहां की स्थिति से था।
शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि 12 तारीख को वह सदर अस्पताल गई थीं। वहां उन्होंने उन छात्रों से मुलाकात की थी जो आंदोलन के दौरान घायल हुए थे और अस्पताल में इलाज करा रहे थे। इसी दौरान उनसे छात्रों के आंदोलन और सरकार से बातचीत को लेकर जानकारी ली गई थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात की थी।

प्रतिनिधिमंडल में एक भी अनशनकारी शामिल नहीं होने पर उठा सवाल
शिल्पी नेहा तिर्की मंत्री ने साफ किया कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मिलने गए छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल में एक भी अनशनकारी शामिल नहीं था। उनका कहना था कि उन्होंने मीडिया के सामने इसी तथ्य को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि उनके बयान का यह मतलब नहीं था कि सरकार छात्रों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है या आंदोलन कर रहे छात्रों की भूमिका को कम करके देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बयान को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे पूरे मामले को सही संदर्भ में समझें और किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी पूरी जानकारी लें।
भाजपा पर निशाना साधते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि उसने इस छात्र आंदोलन को हाईजैक कर लिया है, तो यह केवल उसका भ्रम है। उन्होंने कहा कि छात्र आज भी सतर्क हैं और अपनी मांगों को लेकर जागरूक हैं।

छात्रों को राजनीतिक रूप से भ्रमित करने की कोशिश
मंत्री शिल्पी ने कहा कि कुछ लोगों की ओर से छात्रों को राजनीतिक रूप से भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार लगातार छात्रों की मांगों को समझने और उन्हें सरकार तक पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन मांगों पर सरकार के साथ सहमति बन चुकी है उन पर काम करने के लिए सरकार को थोड़ा समय दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि लंबे समय से अनशन कर रहे छात्रों का अनशन समाप्त हो। छात्रों की मांगों पर बातचीत और समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए, ताकि आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।