द फॉलोअप, रांची
राज्य में संभावित कम वर्षा की स्थिति को लेकर सरकार सतर्क और सक्रिय है। मौसम पूर्वानुमानों में वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान औसत वर्षा में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने संभावित संकट को अवसर में बदलने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को 12 मई तक खरीफ कार्यशाला में जिला स्तरीय आकस्मिक योजना की एक व्यापक और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वह आज कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रही थी। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

श्रीमती तिर्की ने कहा कि यह चुनौती केवल किसी एक क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से मध्य भारत में सूखे जैसी स्थिति बनने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार समय रहते ठोस रणनीति के साथ मैदान में उतर चुकी है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसानों को समय पर जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन, अनुदान एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आकस्मिक निधि (Contingency Fund) की प्रभावी व्यवस्था की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसानों को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा और हर संभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकार ने खेती में विविधीकरण को इस रणनीति का केंद्र बनाया है। किसानों को केवल धान पर निर्भर न रहने की सलाह देते हुए मंत्री ने कहा कि विशेषकर ऊँची भूमि क्षेत्रों में मड़ुआ (रागी), उड़द, मूंग, सोयाबीन जैसी कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही भूमि की प्रकृति के अनुसार धान की उपयुक्त किस्मों के चयन पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित न हो। बागवानी, चारा उत्पादन और बहुउद्देश्यीय खेती को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित हो सकें। सूखे की संभावित स्थिति में मेड़ों पर सब्जी उत्पादन, अरहर की खेती और मिश्रित खेती (इंटरक्रॉपिंग) को प्रोत्साहित कर जोखिम को कम करने की रणनीति अपनाई जाएगी।
