द फॉलोअप डेस्क
झारखंड राज्य गठन आंदोलन के महानायक और आदिवासी समाज के हक-अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले स्वर्गीय शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन करते हुए यह सम्मान प्रदान करेंगी। केंद्र सरकार ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनके नाम की घोषणा की थी। यह सम्मान उन्हें लोक कल्याण, सामाजिक न्याय और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जा रहा है। शिबू सोरेन ने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में झारखंड अलग राज्य आंदोलन को नई धार दी और आदिवासियों, गरीबों तथा वंचित वर्गों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में शामिल रहे गुरुजी ने सामाजिक न्याय और जनाधिकारों की लड़ाई को जनआंदोलन का रूप दिया। उनके योगदान को देखते हुए झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की मांग भी की थी।

परिवार करेगा सम्मान ग्रहण
इस गौरवपूर्ण अवसर का साक्षी बनने के लिए शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन और पुत्रवधू कल्पना सोरेन दिल्ली पहुंच चुकी हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के अनुसार राष्ट्रपति के हाथों प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। सम्मान की घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है तथा विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इसे आदिवासी अस्मिता का सम्मान बताया है।

संघर्ष से शिखर तक का सफर
11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन ने बचपन से ही आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार, जमींदारी शोषण और विस्थापन को करीब से देखा था। यही अनुभव उनके जीवन की दिशा तय करने वाला बना। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और जनजातीय समाज के अधिकारों की लड़ाई को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। 81 वर्ष की आयु में 4 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनका संघर्ष और योगदान आज भी झारखंड की पहचान का अहम हिस्सा है।