द फॉलोअप डेस्क
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि आज पूरे राज्य में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। मुख्य कार्यक्रम रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव नेमरा के लुकैयाटांड़ मैदान में आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी, जिसमें करीब 10 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, झारखंड आंदोलनकारी, सोरेन परिवार के सदस्य और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल होंगे।

उमड़ेगा देशभर से श्रद्धांजलि देने वालों का जनसैलाब
चार अगस्त 2025 को शिबू सोरेन के निधन के बाद नेमरा में उनका अंतिम संस्कार हुआ था। उस समय देशभर से हजारों लोग लगातार दस दिनों तक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी पूरे दस दिनों तक नेमरा में रहकर सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस बार भी झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से समर्थकों के पहुंचने की संभावना है। आदिवासी समाज की भी बड़ी भागीदारी इस श्रद्धांजलि समारोह में देखने को मिलेगी।

नेमरा बना विकास का नया मॉडल
दिशोम गुरु की स्मृति में नेमरा और आसपास के गांवों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रोजगार प्रशिक्षण, आधुनिक दूरसंचार नेटवर्क, सिंचाई व्यवस्था, तालाबों का जीर्णोद्धार, धुमकुड़िया भवन, मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, उपस्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल, लाह की खेती का प्रशिक्षण और सौर ऊर्जा जैसी कई योजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विकास मेला सह परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम में भी शामिल होकर विभिन्न योजनाओं का अवलोकन करेंगे और लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण करेंगे।

भव्य तैयारियां, सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम
लुकैयाटांड़ मैदान स्थित सोना सोबरन प्लस टू हाई स्कूल परिसर में शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। कार्यक्रम स्थल पर लगभग 400 फीट लंबा जर्मन हैंगर पंडाल बनाया गया है, जहां हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। हेलीपैड, वीआईपी पार्किंग, भोजन स्टॉल, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहीं गोला चौक से नेमरा तक श्रद्धांजलि बैनर, झामुमो के झंडे, आकर्षक रोशनी और सोहराय पेंटिंग से पूरे क्षेत्र को सजाया गया है। पैतृक आवास और समाधि स्थल पर भी सामाजिक परंपरा के अनुसार श्रद्धांजलि कार्यक्रम के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।