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 “स्टार्टअप झारखंड” के नाम पर गंभीर सवाल, पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग

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रांची/जमशेदपुर

झारखंड के उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र के बीच इन दिनों एक गंभीर चर्चा और चिंता का विषय सामने आया है। विभिन्न स्टार्टअप्स, उद्यमियों एवं पारितंत्र से जुड़े लोगों द्वारा यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि कुछ निजी संस्थाएं “स्टार्टअप झारखंड” तथा “स्टार्टअप इंडिया (डीपीआईआईटी) द्वारा समर्थित” जैसे नामों, प्रतीकों एवं सरकारी पहचान का उपयोग कर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं तथा स्टार्टअप्स से पंजीकरण शुल्क, स्टॉल शुल्क एवं अन्य प्रकार के वित्तीय शुल्क वसूल रही हैं। जबकि उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों एवं स्टार्टअप इंडिया की “तेजस” (ट्रांसफॉर्मिंग एंटरप्रेन्योरियल जर्नीज अक्रॉस स्टेट्स एंड डिस्ट्रिक्ट्स) योजना के अनुसार, जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं हेतु प्रति जिला 4 लाख तक की वित्तीय सहायता स्वयं स्टार्टअप इंडिया, डीपीआईआईटी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। इसी संदर्भ में इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

ये सवाल उठाये 

-क्या संबंधित संस्था को वास्तव में स्टार्टअप इंडिया अथवा स्टार्टअप झारखंड के साथ किसी प्रकार की आधिकारिक अनुमति, सहयोग अथवा समझौता ज्ञापन (एमओयू) प्राप्त है, जिसके आधार पर वे सरकारी नाम, प्रतीक एवं पहचान का उपयोग कर रहे हैं?

-यदि ऐसी अनुमति दी गई है, तो क्या उन्हें कार्यक्रमों को व्यावसायिक मॉडल पर संचालित करने, स्टार्टअप्स से शुल्क लेने, स्टॉल शुल्क वसूलने अथवा अन्य वित्तीय लेनदेन करने की भी अनुमति प्राप्त है?

-यदि स्टार्टअप इंडिया के प्रतिनिधियों द्वारा किसी आधिकारिक सहयोग से इनकार किया गया है, तो फिर “स्टार्टअप इंडिया (डीपीआईआईटी) द्वारा समर्थित” अथवा “स्टार्टअप झारखंड” जैसे नामों का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है?

-यदि सीसीएल, एक्सएलआरआई (एक्ससाइट), आईएचएम, जियाडा / जियाडको जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं ऐसे आयोजनों से जुड़ी हैं, तो क्या उन्होंने आवश्यक जांच-पड़ताल की है? क्या वे पूरी प्रक्रिया से अवगत हैं अथवा अनजाने में इससे जुड़ रही हैं?

-“आई हब स्टार्टअप झारखंड फाउंडेशन” नामक एक निजी लिमिटेड संस्था, जो शेयर / इक्विटी आधारित मॉडल पर संचालित बताई जा रही है, किस प्रकार लगातार स्वयं को “स्टार्टअप झारखंड” के रूप में प्रस्तुत कर रही है? क्या राज्य सरकार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इसकी जानकारी है?

यदि भविष्य में “स्टार्टअप झारखंड” के नाम पर किसी स्टार्टअप, छात्र, संस्था अथवा उद्यमी के साथ किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

इनको कराया गया अवगत 

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए झारखंड सरकार के मुख्य सचिव, माननीय पुलिस महानिदेशक, एडीजी सीआईडी, सचिव – सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को विस्तृत सूचना एवं शिकायत पत्र ईमेल तथा व्यक्तिगत व्हाट्सऐप संदेशों के माध्यम से भेजा है। साथ ही रांची के सांसद एवं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ तथा राज्यसभा सांसद महुआ मांझी जी को भी इस विषय से अवगत कराया गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी संस्था को स्टार्टअप कार्यक्रम, सम्मेलन अथवा नेटवर्किंग आयोजन करने की पूर्ण स्वतंत्रता है। परंतु यदि बिना किसी वैध समझौता ज्ञापन, आधिकारिक अनुमति अथवा सरकारी अधिकृत साझेदारी के “स्टार्टअप झारखंड” जैसे सरकारी स्वरूप वाले नाम, प्रतीक एवं वेबसाइट का उपयोग इस प्रकार किया जाए कि देश-विदेश के स्टार्टअप्स एवं निवेशकों को यह प्रतीत हो कि यह झारखंड सरकार की आधिकारिक पहल है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। यदि कोई अधिकृत अनुमति नहीं है, तो यह कथित रूप से भ्रामक प्रस्तुतीकरण, सरकारी पहचान के दुरुपयोग एवं संभावित साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जिस पर उचित जांच एवं कार्रवाई आवश्यक है।

अभी शुरुआती एवं संवेदनशील दौर

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन का मानना है कि झारखंड का स्टार्टअप पारितंत्र अभी शुरुआती एवं संवेदनशील दौर में है। ऐसे समय में यदि सरकारी पहचान, योजनाओं एवं नामों का दुरुपयोग होता है, तो इससे निवेशकों, युवाओं एवं उद्यमियों के बीच अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसका दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पूरे राज्य के स्टार्टअप वातावरण पर पड़ेगा।

आज आयोजित प्रेस संवाद के माध्यम से मीडिया जगत के सभी सम्मानित साथियों से निवेदन है कि वे इस विषय को गंभीरता से उठाएं, संबंधित मंचों पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित कराएं तथा झारखंड के स्टार्टअप भविष्य की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। झारखंड का स्टार्टअप भविष्य केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व से मजबूत होगा।


 

Tags - Ranchi Serious Questions Startup Jharkhand Transparency Accountability