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बड़ों के विनाशकारी विकास के बीच पक्षियों को बचा रहे स्कूली बच्चे, इस स्कूल में चल रहा दाना-पानी अभियान!

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जरमुंडी/दुमका:

जब आसमान से आग बरसाने वाली गर्मी पड़ रही है। बारिश के अभाव में सूखे की आहट है। नीति नियंता विनाशकारी विकास की अंधी दौड़ में बहुत तेज दौड़ रहे हैं, तब झारखंड के दुमका जिला अंतर्गत जरमुंडी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरथर के बच्चों ने बेजुबान पक्षियों को बचाने का बीड़ा उठाया है। पर्यावरण संरक्षण और बेजुबान पंक्षियों का जीवन बचाने के  उद्देश्य से बच्चों ने बकायदा दाना-पानी अभियान चला रखा है। 

प्रधानाध्यापक सपन कुमार की पहल रंग लाई
स्कूल के प्रधानाध्यापक डॉ. सपन कुमार की पहल पर पिछले कई वर्षों से दाना-पानी अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। डॉ. सपन कुमार की यह पहल पूरे इलाके में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण  माध्यम बन गई है।

स्कूल सहित गांव के पेड़ों पर टांग दिया बर्तन
दाना-पानी अभियान के तहत स्कूल परिसर समेत गांव में मौजूद सभी पेड़ों और अन्य उपयुक्त जगहों पर मिट्टी का बर्तन टांग दिया जाता है। इनमें पंक्षियों के लिए पानी का इंतजाम रहता है। स्कूली बच्चे नियमित रूप से पंक्षियों को भोजन भी उपलब्ध कराते हैं। स्कूली बच्चे रोजाना पेड़ों पर टंगे इन मिट्टी के बर्तनों में पंक्षियों के लिए पानी और दाना रखते हैं। इससे ना केवल गर्मी, धूप और पानी की कमी से परेशान पंक्षियों को राहत मिली है, बल्कि बच्चों में भी जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित हो रहा है। 

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा
गौरतलब है कि मौजूदा समय में प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन, अनियमित शहरीकरण, बढ़ती आबादी, मशीनों का बेतहाशा इस्तेमाल और अलग-अलग युद्धों की वजह से दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंग, पेयजल संकट और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं से घिरी है। स्थानीय स्तर पर ताल-तिलैया और तालाबों की घटती संख्या से उपजा पेयजल संकट पक्षियों के अस्तित्व के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पक्षियों की कई प्रजातियां आज विलुप्ति के कगार पर है। गिद्ध जैसी महत्वपूर्ण प्रजाति लगभग 99 फीसदी तक खत्म हो चुकी है। ऐसे में पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए पंक्षियों का संरक्षण जरूरी है। 

दाना-पानी अभियान को ये लोग बना रहे हैं सफल
गौरतलब है कि इस अभियान को सफल बनाने में स्कूल का इको क्लब, बाल संसद और विद्यालय प्रबंधन  समिति  के सदस्यों का खास योगदान है।  स्कूल के प्रधानाध्यापक डॉ. सपन कुमार और शिक्षक अनुज कुमार मंडल, सुखलाल मुर्मू, और रामबिलास मुर्मू और विद्यार्थी श्याम मिर्धा, रानी कुमारी, पूजा कुमारी, मधु पार्वती, अनिल मुर्मू, देवनारायण हांसदा, रानी मुर्मू, सूरजमुनी मुर्मू, बिटिया हांसदा और प्रमिला देवी इस मुहिम में शामिल हुए। 
 

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