द फॉलोअप डेस्क
पंजाब से हथियार मंगवाकर झारखंड को दहलाने की खौफनाक साजिश रची गई थी। इसके लिए लोहरदगा के युवकों को ब्रेनवॉश करने के बाद पैसों का लालच दिया गया था। हमले की साजिश दुबई में रची गई थी और निर्देश पाकिस्तान से भी मिल रहे थे। पंजाब से आए हथियारों के जरिए झारखंड की राजदानी रांची के अलावा उत्तर-प्रदेश के कई बड़े शहरों को दहलाने की साजिश रची गई थी। 16 जून की रात को रांची के चुटिया थानाक्षेत्र अंतर्गत निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में पेट्रोल बम से हमला करने के आरोपियों में से एक अमन अंसारी उर्फ गोलू ने जांच एजेंसियों के सामने यह सनसनीखेज खुलासा किया है। अमन अंसारी का दावा है कि आर्थिक तंगी की वजह से वह पैसों के लालच में आ गया था। साजिश के तार झारखंड, बिहार, मुंबई और दुबई तक जुड़े हैं। अमन अंसारी ने पुलिस के सामने जो खुलासे किए हैं, उसके मुताबिक झारखंड और यूपी को दहलाने की साजिश की पूरी कहानी सिलसिलेवार ढंग से आपको बताते हैं। जांच एजेंसियां फिलहाल सूचना की कड़ियां जोड़ रही है।

मूलरूप से झारखंड के लातेहार जिला स्थित सेरक थानाक्षेत्र के रहने वाले 21 वर्षीय अमन अंसारी उर्फ गोलू ने बताया कि वह ग्रेटर त्रिवेणी स्कूल में जब 7वीं कक्षा में पढ़ रहा था, तभी पिता सनीफ मियां की मौत हो गई। उसकी मां ने लोहरदगा निवासी नसीम खान से दूसरा निकाह कर लिया। अमन का कहना है कि 2020 में लॉकडाउन लगा और 8वीं कक्षा में ही उसकी पढ़ाई छूट गई। घर की माली हालत ठीक नहीं थी और ऐसे में साल 2022 में अमन अंसारी रोजगार की तलाश में मुंबई चला गया। मुंबई के नागपाड़ा में उसने एसी रिपेयरिंग का काम सीखा, जिससे उसे प्रतिमाह 12 हजार रुपये तक की कमाई होने लगी। साल 2024 में मुंबई के ही एक एजेंट जिशान शेख की मदद से अमन को विजिट वीजा पर ओमान जाने का मौका मिला। हालांकि, वहां काम नहीं मिलने पर वह वापस लौट आया। सितंबर 2025 में अमन अंसारी मुंबई के रास्ते दुबई गया। यहां उसे मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी नाम की कंपनी में एसी मैकेनिक के रूप में नौकरी मिली। उसे यहां प्रतिमाह 35-40 हजार रुपये की सैलरी मिलती थी। यहीं, अमन की मुलाकात बिहार के सिवान जिला निवासी सुलेमान अंसारी, यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले मो. आजम और केरल निवासी अहमद अली से हुई। वीजा खत्म हुआ तो अमन जनवरी 2026 में भारत लौटा और भारत पेट्रोलियम में मजदूरी करने लगा।

अमन अंसारी ने जांच एजेंसियों को बताया है कि ईद के त्योहार में वह मुंबई से अपने घर लोहरदगा लौटा। बकौल अमन अंसारी, दुबई में साथ काम करने वाले अहमद अली ने उसका नंबर आवेश राजपूत उर्फ राणा जी और शहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्रफ भट्टी को उसका फोन नंबर दिया। 5 जून 2026 को आवेश राजपूत उर्फ राणाजी ने व्हाट्सएप पर उससे संपर्क किया। अमन के मुताबिक राणा जी ने उसे पैसों का लालच दिया और कहा कि 2-3 लड़कों का इंतजाम करो, झारखंड में कुछ बड़ा करवाना है। अमन के मुताबिक इस काम के बदले उसे बड़ी रकम ऑफर की गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहा अमन पैसों के लालच में आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए इस साजिश में शामिल हो गया। राणा जी ने अमन से कहा था कि उसे पंजाब से हथियार लाना होगा। इसके बाद कहे मुताबिक घटना को अंजाम देना है।

अमन अंसारी ने पुलिस को बताया कि राणा जी ने उसे पंजाब यात्रा के लिए खर्च भेजने के लिए बैंक अकाउंट नंबर मांगा। अमन अंसारी ने लोहरदगा बस स्टैंड के पास ढोड़हा टोली स्थित सादीक रजा के मोबाइल शॉप के अलावा अपने दोस्त सैफ अंसारी का स्कैनर राणा जी को भेजा। राणा जी ने दोनों स्कैनर पर 5-5 हजार रुपये भेजे। साजिश को अंजाम देने के उद्देश्य से राणाजी ने नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाने के लिए एक नया मोबाइल नंबर भी मांगा। अमन अंसारी ने लोहरदगा निवासी दोस्त हैदर अली से गिरवी रखा हुआ मोबाइल फोन और सिमकार्ड लिया, जिसका नंबर राणा जी को दिया। अमन ने जो ओटीपी भेजी, राणा जी ने उसी से व्हाट्सएप अकाउंट बनाया और लड़कों को निर्देश देने लगा।
राणा जी के निर्देश पर अमन अंसारी 8 जून 2026 को टाटा अमृतसर ट्रेन से पंजाब के लिए रवाना हुआ। डाल्टनगंज स्टेशन पर एक सहयात्री अमन अंसारी का मोबाइल फोन लेकर उतर गया था, हालांकि, उसने फोन वापस लिया और दूसरी ट्रेन पकड़कर 10 जून को पंजाब के अमृतसर पहुंचा। यहां वह राजू मेहता नाम के शख्स के होटल में ठहरा। पंजाब में रहते हुए ही अमन अंसारी ने लोहरदगा के अपने 2 और दोस्तों सैफ अंसारी उर्फ रोहित और सायम सुजान को व्हाट्सएप के जरिये साजिश में शामिल किया। 11 जून को राणा जी के निर्देश पर अमन अंसारी अमृतसर के हुटर में हाइवे के पास बीर नाम के व्यक्ति से मिला, जिसने उसे गांजा उपलब्ध कराया। इस बीच हथियार मिलने में देरी और योजना में बदलाव के कारण राणा जी ने व्हाट्सएप पर ही अमन अंसारी को झारखंड वापस लौटने का निर्देश दिया। अमन, 12 जून को बस से दिल्ली पहुंचा और फिर वापस लोहरदगा आ गया।
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अमन अंसारी जब लोहरदगा वापस लौट आया तो 15 जून की रात को आवेश राजपूत उर्फ राणा जी और सहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्फ भट्टी ने उससे व्हाट्सएप के जरिए फिर संपर्क किया। अमन अंसारी को निर्देश मिला कि रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में पेट्रोल बम फेंककर आग लगाना है। अमन अंसारी को आरएसएस कार्यालय की फोटो और इसका लोकेशन भी राणा जी ने व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराई। पूर्व नियोजित साजिश के तहत 16 जून की शाम को करीब 5 बजे अमन और सैफ अंसारी ट्रेन से रांची पहुंचे। उन्होंने यहां सायम सुजान को फोन किया और बताया कि काम पूरा होने पर 50,000 रुपये मिलेंगे। शाम को 7 बजे तीनों सायम सुजान के मकान में इकट्ठा हुए और लेक रोड पहुंचे। यहां दुकान से पानी की खाली बोतल, 130 रुपये का पेट्रोल, लट्टू का फीता और झोला खरीदा। सारा सामान खरीदने के बाद तीनों ई-रिक्शा के जरिए कांटा टोली के रॉयल इन होटल पहुंचे और 1000 रुपये में कमरा नंबर-202 बुक किया। उसी रात को करीब 9 बहजे राणा जी और भट्टी ने व्हाट्सएप कॉल पर उसी रात घटना को अंजाम देने का निर्देश दिया, साथ ही कहा कि घटना का वीडियो बनाकर भेजना है। अमन अंसारी ने पूछा कि पेट्रोल बम कैसे बनाना है तो राणा जी ने एक गाइड वीडियो भेजा।

वीडियो देखने के बाद तीनों होटल के सामने पेट्रोल पंप के पास एक चाउमीन की दुकान पर पहुंचे और वहां चिली सॉस की खाली बोतल और कोल्ड ड्रिंक की बोतल का जुगाड़ किया। बोतल का जुगाड़ करने के बाद वापस होटल के कमरे में गए और पेट्रोल बम बनाया। 16 जून की रात को करीब 11 बजे सायम सुजान ने रैपिडो एप पर सेंट्रो कार बुक की। तीनों कार से तय योजना के मुताबिक आरएसएस दफ्तर पहुंचे। सायम सुजान से कहा गया कि वह गाड़ी घुमाकर नजर रखे। अमन अंसारी और सैफ अंसारी के हाथ में पेट्रोल बम था। सैफ अंसारी वीडियो बनाने लगा और अमन अंसारी ने पहला पेट्रोल बम आरएसएस कार्यालय को निशाना बनाकर फेंका, लेकिन वह नहीं फटा। बम नहीं फटा तो दोनों घबराकर वापस कार में बैठे जहां सायम सुजान ने राणा जी को फोन मिलाया। अमन अंसारी ने बताया कि बम नहीं फटा। इतना सुनते ही राणा जी ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई और दूसरा बम फेंकने का आदेश दिया। अमन और सैफ अंसारी फिर गाड़ी से उतरे और दूसरा पेट्रोल बम दफ्तर पर फेंका और कार में बैठकर भाग निकले। इस घटना का पूरा वीडियो बनाकर व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत आवेश राजपूत उर्फ राणा जी को भेज दिया।
वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी वापस कांटाटोली स्थित होटल रॉयल इन आए और सो गए। अगले दिन 17 जून को करीब 10 बजे उन्होंने होटल से चेक-आउट किया, लेकिन बेड रनर और अपना तौलिया वहीं छोड़ दिया। अमन अंसारी का कहना है कि होटल से निकलने के बाद पकड़े जाने के डर से उसने और सैफ ने नए कपड़े खरीदे। पुराने कपड़े सायम सुजान को दिए। सायम सुजान ने उन कपड़ों की गठरी बनाई और खादगढ़ा बस स्टैंड के पास निर्माणाधीन नगर निगम बिल्डिंग के पीछे प्लास्टिक के पोस्टर में लपेटकर छिपा दिया। इसके बाद हमले के मास्टरमाइंड आवेश राजपूत उर्फ राणा जी ने आरोपियों को कहा कि वे झारखंड छोड़ दें। राणा जी का निर्देश मिला को कानपुर जाओ। बकौल अमन अंसारी, उन तीनों से कहा गया कि कानपुर से लखनऊ जाकर दूसरी बड़ी घटना को अंजाम देना है। हमला क्या, कहां और कब होगा, यह वहां पहुंचने पर बताने की बात कही थी।
राणा जी के आदेश पर अमन और सैफ अंसारी 17 जून की दोपहर को करीब पौने 3 बजे कानपुर जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। हालांकि, तब तक रांची में पुलिस और जांच एजेंसियां सक्रिय हो चुकी थी। सैफ और अमन अंसारी जिस ट्रेन में बैठे थे, वह अभी कोडरमा के आगे गझहंडी स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि दोनों को घिर जाने का अहसास हुआ। पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई थी। दोनों ट्रेन से उतरकर भागने का मौका ढूंढ़ने लगे, लेकिन तभी वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें धर-दबोचा। पुलिस ने उनका मोबाइल फोन जब्त किया। अमन अंसारी ने बताया कि उसके मोबाइल फोन में आवेश राजपुर उर्फ राणा जी और सहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्फ भट्टी के साथ बातचीत का व्हाट्सएप कॉल लॉग, चैट और अन्य साक्ष्य है। पुलिस अब यह जानना चाहती है कि यूपी में कौन से हमले को अंजाम दिया जाना था।