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वाणिज्यकर विभाग : अक्टूबर माह तक लक्ष्य से 9 फीसदी कम राजस्व की वसूली

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द फॉलोअप डेस्क
वित्त एवं वाणिज्यकर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में वाणिज्य कर विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध राजस्व संग्रहण की प्रगति एवं भविष्य की कार्य योजना की समीक्षा की। कांके रोड स्थित उत्पाद भवन के सभागार में की गई समीक्षा में वाणिज्य कर विभाग के सचिव, अमिताभ कौशल एवं आयुक्त, अमित कुमार सहित रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, धनबाद तथा संथाल परगना प्रमंडल के वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 में वाणिज्य कर विभाग के द्वारा राजस्व संग्रहण के लिए निर्धारित किए गए 26,500 करोड़ रुपये  के लक्ष्य को प्राप्त करना आपके जुनून में शामिल होना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि झारखण्ड के विकास के लिए आंतरिक स्रोतों से राजस्व को बढ़ाये जाने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि झारखण्ड आर्थिक रूप से मजबूत हुआ तो देश का बाजार भी झारखण्ड को आर्थिक सहयोग करने के लिए तैयार रहेगा और यदि हम कमजोर हुए तो बाजार का सहयोग भी हमें प्राप्त नहीं होगा।वाणिज्य-कर अधिकारियों को संबोधित करते हुए राधाकृष्ण किशोर ने यह भी कहा कि वह अच्छी तरह से जानते हैं कि हमारे अधिकारी मानव संसाधन और वाहन जैसे आधारभूत संरचनाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। लेकिन जो अभाव में भी बेहतर प्रदर्शन करता है वही श्रेष्ठ कहलाता है।

वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री ने समीक्षा के क्रम में पाया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में वाणिज्य-कर से 26,500 करोड़ रुपये के संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके विरुद्ध अक्टूबर माह तक 49.41% ही राजस्व की प्राप्ति हुई है जबकि अक्टूबर माह में लक्ष्य की प्राप्ति 58% होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अभी भी हमारे पास पांच महीने का वक्त है। इस दरमियान शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने में अधिकारी जी जान से लग जाएं। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि VAT और GST में लगभग 3,150 करोड़ रुपये के बकाये की राशि की वसूली में तत्परता दिखाएं और न्यायालयों में लंबित मामले जिसमें 4241 करोड़ रुपये की राशि संहित है, का निष्पादन शीघ्र करायें ताकि ये राशि राजकोष में जमा हो सके। वित्त मंत्री ने कहा कि GST का फर्जी निबंधन कराने वाले लोगों के विरुद्ध आवश्यकता अनुसार थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करायें ताकि फर्जी निबंधन के माध्यम से राजस्व की क्षति पर रोक लगाया जा सके।


 

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