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करप्शन के गंभीर आरोपों में घिरे राजीव अरुण एक्का को मिलेगी प्रोन्नति, तैयारी में सरकार

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द फॉलोअप डेस्क:

करप्शन के आरोपों में घिरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पूर्व प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का को मुख्य सचिव रैंक में प्रोन्नति देने की तैयारी चल रही है। फाइल तैयार की जा रही है। बता दें कि 1994 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव अरुण एक्का सीएम हेमंत सोरेन के प्रधान सचिव रहे हैं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा राजीव अरुण एक्का का निजी कार्यालय में सीएमओ की फाइल निपटाने का वीडियो जारी किए जाने के बाद उन्हें सीएम के प्रधान सचिव के पद से हटा दिया गया था। बता दें कि झारखंड के हिंदी डिजिटल वेबसाइट न्यूजविंग के पत्रकार निखिल कुमार ने यह खबर ब्रेक की है।

पंचायती राज विभाग में हैं प्रधान सचिव
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद से हटाए जाने के बाद राजीव अरुण एक्का को पंचायती राज विभाग में प्रधान सचिव बनाया गया। साथ ही उनको एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया। बता दें कि राजीव अरुण एक्का पर करप्शन के गंभीर आरोप हैं। राज्य में मनरेगा, खनन और जमीन घोटाला केस की जांच कर रही ईडी ने राज्य सरकार को राजीव अरुण एक्का पर कार्रवाई की अनुशंसा को लेकर जो चिट्ठी लिखी है उसमें ऐसे साक्ष्यों का जिक्र है जिसके आधार पर ईडी का कहना है कि उन्होंने विशाल चौधरी के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रियाओं में गड़बड़ी कर अवैध कमाई की। केवल इतना ही नहीं। ईडी ने कहा है कि राजीव अरुण एक्का ने आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की मनपसंद ट्रांसफर और पोस्टिंग के एवज में भी खूब नोट छापे हैं। 

केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने मांगी हैं रिक्तियां
बता दें कि केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने सीएस यानी मुख्य सचिव रैंक पर प्रमोशन के लिए रिक्तियां मांगी गई है। बताया जा रहा है कि जैसे ही रिक्तियां जारी की जाएंगी, वैसे ही राज्य सरकार की ओर से डीपीसी की बैठक की जाएगी जिसमें राजीव अरुण एक्का को प्रमोशन दिए जाने पर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि यह प्रमोशन 1 जनवरी 2024 से प्रभावीहो जाएगा। वहीं, राजीव अरुण एक्का 31 मार्च 2024 को रिटायर हो जाएंगे। कुल मिलाकर राजीव अरुण एक्का 3 महीने ही मुख्य सचिव रहेंगे। 

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रह चुके हैं राजीव अरुण एक्का
1994 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव अरुण एक्का ने झारखंड में कई अहम पद संभाले हैं। शुरुआत में रांची सहित अन्य जिलों के उपायुक्त रहे राजीव अरुण एक्का कुछ महीने पहले तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रधान सचिव हुआ करते थे। इसी बीच खनन घोटाला केस में ईडी ने उनसे पूछताछ की। फिर, बाबूलाल मरांडी द्वारा एक वीडियो जारी किया गया जिसमें राजीव अरुण एक्का निजी ऑफिस में कथित तौर पर सीएमओ की फाइल निपटाते देखे गए। उन्हें प्रधान सचिव के पद से हटा दिया गया और सरकार ने जांच आयोग का गठन किया। आयोग ने उनको क्लीन चिट दे दी। 

ईडी की चिट्ठी में राजीव अरुण एक्का पर हुए थे कई खुलासे
हाल ही में ईडी ने राजीव अरुण एक्का पर कार्रवाई को लेकर कार्मिक विभाग को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में जिक्र था कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करके राजीव अरुण एक्का और उनके सहयोगी विशाल चौधरी ने अवैध संपत्ति जुटाई। काली कमाई को राजीव अरुण एक्का की पत्नी और बेटी के बैंक खातों में जमा कराया। यह भी पता चला कि विशाल चौधरी की पत्नी ने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर राजीव अरुण एक्का को महंगे गिफ्ट और रकम दी। राजीव अरुण एक्का ने इसे दोस्तों से लिया गया कर्ज बताया। अवैध कमाई को शेल कंपनियों में निवेश करने की जानकारियां भी सामने आईं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। ईडी ने कार्मिक विभाग से कार्रवाई की अनुशंसा की लेकिन विभाग की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। 

जाहिर है कि यदि राज्य सरकार कोई कार्रवाई ही नहीं करना चाहे तो प्रमोशन में कोई रुकावट भी नहीं आएगी। 

बाबूलाल मरांडी ने लगाया था भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप
गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखी थी। आरोप लगाया था कि राज्य में अधिकारी करप्शन में लिप्त हैं। भ्रष्ट अधिकारियों को सरकार का संरक्षण हासिल है। उन्होंने कहा कि एजेंसियां कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को चिट्ठी लिखती है लेकिन विभाग प्रतिक्रिया नहीं देता। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।