logo

जामताड़ा सदर अस्पताल में तड़पती रही प्रसूता, दलाल के झांसे में निजी हॉस्पिटल पहुंचे घरवाले; नवजात को छोड़ भागे

jamtara15.jpg

द फॉलोअप डेस्क, जामताड़ा
जामताड़ा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। प्रसव के बाद इलाज के बकाया बिल को लेकर हुए विवाद में एक नवजात बच्ची को अस्पताल में छोड़कर परिजनों के चले जाने की सूचना पुलिस तक पहुंची।

पुलिस की पहल के बाद बच्ची को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। हालांकि, इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से लेकर निजी अस्पतालों और कथित दलालों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, मिहिजाम थाना क्षेत्र के बोधमा निवासी स्वरूप दास की 37 वर्षीय पत्नी ललिता साव को 25 अगस्त की रात प्रसव पीड़ा होने पर जामताड़ा सदर अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि काफी देर तक महिला दर्द और रक्तस्राव से तड़पती रही, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिला। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे धनबाद स्थित SNMMCH/PMCCH रेफर कर दिया।

कम खर्च में सामान्य प्रसव कराने का भरोसा दिलाया
परिजनों ने बताया कि धनबाद ले जाने के लिए उन्होंने सरकारी एंबुलेंस से संपर्क किया, लेकिन काफी इंतजार के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसी दौरान कथित तौर पर एक दलाल ने उनसे संपर्क किया और जामताड़ा मेमोरियल अस्पताल में कम खर्च में सामान्य प्रसव कराने का भरोसा दिलाया। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसे रेलवे साइडिंग रोड स्थित निजी अस्पताल ले गए।

वहां 25 अगस्त की रात ललिता ने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि सामान्य प्रसव का भरोसा देने के बावजूद अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन किया गया। इलाज के बाद करीब 35 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह रकम जुटाना मुश्किल हो गया।

अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को किया खारिज 
इसके बाद 1 सितंबर को परिजन अस्पताल प्रबंधन से यह कहकर निकले कि वे बकाया राशि की व्यवस्था करने बैंक जा रहे हैं। देर शाम तक उनके वापस नहीं लौटने पर अस्पताल प्रबंधन ने जामताड़ा थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने परिजनों के गांव में संपर्क किया। और 2 सितंबर को उन्हें थाने बुलाया।

आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नवजात बच्ची को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। वहीं, जामताड़ा मेमोरियल अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि बकाया राशि जमा करने में असमर्थ होने के कारण परिजन बच्ची को अस्पताल में छोड़कर चले गए थे।

मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी

अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी अस्पताल में इलाज और एंबुलेंस की व्यवस्था में क्या कमी रही, निजी अस्पताल में इलाज के दौरान क्या हुआ और कथित दलाल की भूमिका क्या थी। यह मामला गरीब मरीजों की स्वास्थ्य सुरक्षा और निजी चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने लाता है।

Tags - Jamtara NewsJamtara Sadar HospitalHealthcare NegligencePrivate HospitalNewborn Baby Case