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एल खियांग्ते की जल्द हो गिरफ्तारी, CID खानापूर्ति कर रही है; JPSC प्रकरण की CBI जांच हो- प्रतुल शाहदेव

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रांची
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य सरकार पर प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और भर्ती घोटालों का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के साढ़े छह वर्षों का कार्यकाल युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बन गया है। उन्होंने मांग की कि इस अवधि में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई से जांच कराई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए, जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द की जाए और पूरे मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की जाए। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जब पूरे आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तब केवल कुछ अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के सभी सदस्यों को बर्खास्त कर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नई नियुक्तियां की जाएं, ताकि युवाओं का आयोग पर भरोसा बहाल हो सके।
पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी की मांग
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते के खिलाफ गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होना इस बात का संकेत है कि सीआईडी निष्पक्ष जांच के बजाय "फ्रेंडली मैच" खेल रही है और सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की गिरफ्तारी से सच्चाई सामने नहीं आएगी। आयोग के शीर्ष पदों पर रहे अधिकारियों से रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की जानी चाहिए।
जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि एल. ख्यांगते ने तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के स्थानांतरण के बाद भी उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने अकेले परीक्षा परिणाम पर हस्ताक्षर किए और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का चयन किया। उन्होंने कहा कि ये सभी फैसले आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
निजी एजेंसियों को संवैधानिक अधिकार देना गलत
उन्होंने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 तथा संविधान के अनुच्छेद 315, 316 और विशेष रूप से अनुच्छेद 320 के अनुसार निजी एजेंसियों की भूमिका केवल तकनीकी और सहायक कार्यों तक सीमित हो सकती है। परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करना और अंतिम चयन जैसे मूल संवैधानिक अधिकार आयोग के पास ही रहने चाहिए। यदि इन कार्यों में निजी एजेंसियों को शामिल किया गया है, तो यह केवल प्रक्रियागत त्रुटि नहीं बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
कांग्रेस की चुप्पी पर भी साधा निशाना
प्रतुल शाहदेव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में युवाओं के मुद्दे पर राजनीति करने वाली कांग्रेस झारखंड में जेपीएससी से जुड़े कथित घोटालों पर पूरी तरह मौन है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कांग्रेस इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर कांग्रेस की खामोशी उसके दोहरे राजनीतिक चरित्र को उजागर करती है।
 

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