द फॉलोअप डेस्क
कांग्रेस से तीन साल के निष्कासित किए जाने के बाद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने कहा है कि उनकी पार्टी ने कार्रवाई करने में जितनी तत्परता दिखायी है अगर इतनी तत्परता 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने में करते तो हजारों रैयतों को लाभ होता। लेकिन कांग्रेस और सरकार में बैठे कुछ लोगों के कारण उन्हें निष्कासित किया गया। ये वे लोग हैं जो राज्य सरकार और पार्टी में बैठे ये लोग एनटीपीसी की दलाली कर रहे हैं। कांग्रेस में बैठे कुछ लोग कीलर हैं। ये कांग्रेस को कमजोर करने में लगे हैं। यहां तक कहा कि अब कांग्रेस सरकार चला रही है या सरकार कांग्रेस को चला रही है, समझ में नहीं आ रहा। उन्होंने आगे कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा और वह कांग्रेस तथा राहुल गांधी के प्रति समर्पित भाव से काम करते रहेंगे। योगेंद्र साव शुक्रवार की शाम मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
.jpg)
उनसे जब पूछा गया कि पिछले दिनों आपने राहुल गांधी से मुलाकात की थी, उन्होंने जनता की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया था, फिर कांग्रेस ने आपको निष्कासित क्यों कर दिया। योगेंद्र साव ने कहा कि राहुल गांधी के आस पास रहने वाले कुछ दलाल और चाटुकारों के कारण यह निर्णय लिया गया है। फिर यह सवाल करने पर कि क्या राहुल गांधी दलालों और चाटुकारों की बात सुन रहे हैं, वे चुप रह गए। इस सवाल पर कि एनटीपीसी के विरुद्ध जारी लड़ाई में राज्य सरकार, कांग्रेस और हजारीबाग क्षेत्र की जनता भी अब आपके साथ नहीं है, ऐसा क्यों है। क्या आप जनहित के नाम पर निजी हित की लड़ाई लड़ रहे हैं। योगेंद्र साव ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने बताया कि तीन बार बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र से वह और उनका परिवार चुनाव जीता। एक बार हार गए तो पार्टी साथ छोड़ दी। एक बार मुख्यमंत्री के विरुद्ध टिप्पणी कर दिए तो गुनाह कर दिया। फिर यह भी कहा कि क्यों नहीं करता। कई बार मुख्यमंत्री से मिल कर उन्होंने विस्थापितों और रैयतों की समस्याओं से अवगत कराया। उनकी बेटी अंबा प्रसाद भी सदन में इस मुद्दे को उठाती रही। सरकार और पार्टी के संज्ञान में लाती रही। लेकिन न सरकार सुनी और न पार्टी।
.jpeg)
योगेंद्र साव ने आरोप लगाया कि उन्हें बगैर नोटिस और स्पष्टीकरण दिए पार्टी ने निष्कासित कर दिया। इसी तरह बगैर नोटिस दिए प्रशासन ने भी 19 मार्च को जब वह आवास पर नहीं थे, उनका केरेडारी के जोरदाग स्थित आवास को ध्वस्त कर दिया। उस समय उनकी पत्नी नाईटी में थी। इससे पहले उनका सेरामिक फैक्ट्री को तोड़ दिया। इसके मुआवजा के रूप में उन्हें 1.97करोड़ दिया जा रहा था, जबकि उन्हें 20करोड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। अनुशासन समिति के चेयरमैन रामेश्वर उरांव को निष्पक्ष बताते हुए उन्होंने कांग्रेस में बैठे लोगों को ही बार बार दोषी, दलाल और चाटुकार बताते रहे। मालूम हो कि अनुशासन समिति की अनुशंसा पर ही उन्हें पार्टी से तीन साल के लिए निष्कासित किया गया है।
एनटीपीसी ने आरोपों को गलत बताया
एनटीपीसी ने आधिकारिक रूप से कहा है कि योगेंद्र साव को तीन तीन बार नोटिस दी गयी थी। केरेडारी स्थित जोरदाग गांव में बना उनका मकान कोल बीयरिंग एक्ट तहत 2008 में अधिग्रहित भूमि पर बनी थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा उठाया गया कदम नियमानुकूल है.
