द फॉलोअप, रांची
राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने यू टर्न लेते हुए अपना प्रत्याशी नहीं देने का फैसला किया है। भाजपा ने अब निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का समर्थन करने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु ने जदयू, लोजपा, आजसू के अलावा भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायकों को परिमल नाथवानी का प्रस्तावक बनने का निर्देश दिया है। नाथवानी भाजपा के समर्थन से 8 जून को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नाथवानी रात 8.30 बजे तक दिल्ली से रांची पहुंचेंगे। मालूम हो कि नाथवानी कल मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद रात में ही दिल्ली रवाना हो गए थे। वह दिल्ली तब रवाना हुए जब उन्हें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी उनका प्रस्तावक नहीं बनेगी। दिल्ली में दिन भर रह कर नाथवानी ने गोटी सेट किया और भाजपा का समर्थन हासिल करने में सफल हुए। झामुमो नहीं चाहता था कि परिमल नाथवानी का प्रस्तावक बन कर वह कांग्रेस से प्रत्यक्ष रूप से अपना विरोधी छवि प्रदर्शित करे।
भाजपा के इस फैसले से अब नाथवानी की जीत सुनिश्चित दिखने लगी है वहीं कांग्रेस को अपने प्रत्याशी को विजय दिलाने की चुनौती और बढ़ गयी है। मालूम हो कि इंडिया गठबंधन के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस से बार बार यही कह रहे थे। वह बता रहे थे कि कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं दे और झामुमो को दोनों प्रत्याशी खड़ा करने दे। लेकिन झामुमो और कांग्रेस के बीच इस बात पर सहमति नहीं बनी। हालांकि अभी मुख्यमंत्री आवास में इंडिया गठबंधन के सभी विधायकों की बैठक हो रही है। इसमें कांग्रेस के पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा भी शामिल
नाथवानी के उम्मीदवार बनने से चहुंओर हरियाली
इधर नाथवानी के निर्दलीय प्रत्याशी बनने से कांग्रेस छोड़ भाजपा, झामुमो, राजद समेत अन्य सभी दलों के विधायकों के चेहरे पर मुस्कान देखी जाने लगी है। राजनीति के रणनीतिकारों का भी मानना है कि भाजपा का समर्थन मिलने के बाद नाथवानी को मात्र चार मतों का ही जुगाड़ करना है, जो उनके लिए बहुत आसान है। यह उनके चुटकी का खेल है।

कांग्रेस की चुनौती बढ़ी
नाथवानी के निर्दलीय प्रत्याशी बनने के बाद अब कांग्रेस की चुनौती सबसे अधिक बढ़ गयी है। 18 जून को मतदान के बाद कांग्रेस के लिए यह साबित करना कठिन चुनौती है कि उनके सभी 16 विधायक भी एकजुट रहे। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को सभी 16 विधायकों ने मतदान किया। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस की स्थिति और कमजोर होगी और आने वाले दिनों में इसका राज्य सरकार की सेहत पर भी दिखना अवश्यंभावी हो जाएगा।
