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पांकी में डॉ. वीरेंद्र कुमार का निजी क्लीनिक सील, कंपाउंडर कर रहा था इलाज

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ख़ुशी ठाकुर/ पलामू

पलामू के पांकी थाना क्षेत्र के गजबोर स्थित डॉ. वीरेंद्र कुमार के निजी क्लीनिक को बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया। यह कार्रवाई सिविल सर्जन के निर्देश पर प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में की गई। सोमवार को इलाज के दौरान 7 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग लगातार मामले की जांच कर रहा था। जांच के आधार पर क्लीनिक को सील करने का निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले इसी क्लीनिक में इलाज के दौरान 7 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक के संचालन से जुड़े दस्तावेजों और व्यवस्थाओं की जांच शुरू की।


मंगलवार को विरोध के कारण टली कार्रवाई, बुधवार को क्लीनिक किया गया सील
मंगलवार शाम पांकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद, पांकी के अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह जांच के लिए क्लीनिक पहुंचे थे। इस दौरान क्लीनिक के बाहर कुछ लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। मामले की जानकारी मिलने पर डीएसपी प्रशांत कुमार ने भी अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट ली। विरोध की स्थिति के कारण मंगलवार को कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम दोबारा क्लीनिक पहुंची और प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस बल की मौजूदगी में नियमानुसार क्लीनिक को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान परिसर का निरीक्षण किया गया और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस दौरान चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद, सीआई उपेंद्र कुमार, डॉ. रियाज अनवर, सुमित कुमार, शमशाद अंसारी तथा पांकी थाना के एसआई रविंद्र कुमार सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।

कंपाउंडर कर रहा था इलाज, पहले भी लगा था एक लाख रुपये का जुर्माना
चिकित्सा प्रभारी डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि संबंधित निजी क्लीनिक पर पहले ही एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका था। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को क्लीनिक को सील किया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि क्लीनिक में कंपाउंडर द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा था, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि 7 वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में अब तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यदि आवेदन मिलता है तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने निजी क्लीनिकों की नियमित जांच और चिकित्सकीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि जिले में संचालित निजी क्लीनिकों की निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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