जामताड़ा
जामाताड़ा प्रखंड के पंजनिया पुराना टोला में भीषण जल संकट से त्रस्त ग्रामीणों का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया. पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान गांव की महिलाओं पुरुष ने खराब चापाकल और ठप पड़ी जल मीनार के पास खाली बाल्टियां रखकर अपनी नाराजगी जाहिर की.
2 चापाकल और जल मीनार भी बंद
करीब 150 की आबादी वाले इस टोले में सरकारी स्तर पर तीन चापाकल और जन जल योजना के तहत 5000 लीटर की एक जल मीनार स्थापित है. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से दो चापाकल पूरी तरह खराब हैं, जबकि एकमात्र जल मीनार भी एक महीने से बंद पड़ी है. वर्तमान में केवल एक चापाकल चालू स्थिति में है, लेकिन उससे भी बेहद कम पानी निकलता है, जिससे पूरे गांव की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है.

उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी सुभाष मिर्धा ने कहा कि ग्रामीणों को पीने के पानी से लेकर खाना बनाने और स्नान तक के लिए मीलों दूर जाना पड़ रहा है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, "हमने कई बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. यदि अगले दो-तीन दिनों के भीतर चापाकल और जल मीनार की मरम्मत नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे." इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से विष्णु प्रसाद मिर्धा, अमित, लक्ष्मण, भागीरथ, मोहन, संतोष, सिकंदर मोहाली, अनवर अंसारी, अजीम अंसारी, तेजेंद्र बास्की, कौशल्या देवी, चंपा कुमारी, देवंती देवी, सीमा देवी और उर्मिला कुमारी सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे. सभी ने एक स्वर में जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है.
.jpeg)