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पड़हा समाज के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई में बंधु तिर्की ने ग्रामसभा सम्मान का उठाया सवाल

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रांची
आज रांची की सड़कों पर केवल भीड़ नहीं, बल्कि पूर्वजों की विरासत की गूंज सुनाई दी। झारखंड पड़हा समिति के नेतृत्व में राजभवन (लोक भवन) के समक्ष सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर अपनी जमीन और ग्रामसभा के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे। यह आंदोलन केवल जमीन का नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादा, पांचवीं अनुसूची और ग्रामसभा के सम्मान की लड़ाई बनकर सामने आया। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, लाल किशोर नाथ शाहदेव सहित अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों ने किया।
इस मौके पर बंधु तिर्की ने कहा कि नामकुम अंचल के कूट्टेटोली मौजा स्थित 5 एकड़ भूमि (खाता संख्यां.-144, प्लॉट नं.-887), जिसे ग्रामीण ओबरिया कूट्टेटोली टोंगरी के नाम से जानते हैं, सदियों से ओबरिया, भुसूर और चंदाघासी गांवों के पशुओं के लिए चारागाह रही है। यह जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका, संस्कृति और सामूहिक जीवन का आधार है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में ग्रामसभा की अनुमति को दरकिनार करते हुए और कथित तौर पर फर्जी स्वीकृति दिखाकर इस सामुदायिक चारागाह को “व्यक्ति विकास केन्द्र इंडिया” नामक संस्था के नाम बंदोबस्त कर दिया गया। इसे पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया गया।


ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इस अवैध कब्जे का विरोध किया तो उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय लोगों पर फर्जी मुकदमे भी दर्ज कराए गए, ताकि वे अपने हक की लड़ाई से पीछे हट जाएं। बावजूद इसके, कूट्टेटोली की ग्रामसभा आज भी अपने फैसले पर अडिग है। उपायुक्त से लेकर वरीय अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद अब यह लड़ाई राजभवन तक पहुंची है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखीं। इनमें राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट में विशेष निर्णय लेकर व्यक्ति विकास केन्द्र इंडिया को दी गई इस कथित अवैध बंदोबस्ती को अविलंब रद्द करना, रद्दीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक जमीन पर ग्रामसभा कूट्टेटोली का कब्जा बरकरार रखना और संबंधित जमाबंदी को तत्काल ‘फ्रीज’ करना शामिल है।
प्रदर्शन में सभा के अध्यक्ष अजित उरांव, अजय टोप्पो, राधे तिर्की, निगा विर्भ, बेला कच्छप, मेरी कच्छप, उषा कच्छप, फुलमनी, सुनीता देवी, सुषमा कच्छप, नेहा देवी, सबीता कच्छप और सीता कच्छप समेत बड़ी संख्या में पड़हा समाज के सदस्य मौजूद थे।


 

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