द फॉलोअप डेस्क
शिक्षक दिवस के अवसर पर उपायुक्त कंचन सिंह ने अपने जीवन के सभी गुरुओं और मार्गदर्शकों को नमन किया। उन्होंने प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए कहा, “गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़-गढ़ काढ़े खोट, अंतर हाथ सहार दे, भीतर मारे चोट।” उन्होंने इसे अपने जीवन से जोड़ते हुए कहा कि उनके गुरुओं ने भी उन्हें भीतर से सहारा देते हुए समय-समय पर आघात देकर उन्हें तराशा है।
उपायुक्त ने अपने संदेश की शुरुआत अपनी माँ को नमन करते हुए की। उन्होंने माँ को “सादा जीवन, उच्च विचार” की साक्षात प्रतिमूर्ति बताया। अपने पिता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्होंने उन्हें ज्ञान, अनुशासन और जीवन-मूल्यों की घुट्टी पिलाई। प्राथमिक शिक्षा के दिनों को याद करते हुए उपायुक्त ने भवनहीन विद्यालय में पढ़ाने वाले अपने शिक्षक श्री मूलचंद यादव का विशेष रूप से आभार प्रकट किया। साथ ही उन्होंने इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय हजारीबाग और साइंस कॉलेज पटना के शिक्षकों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनके जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने अपने श्वसुर को भी “कुल शिक्षक” की उपाधि देते हुए श्रद्धापूर्वक स्मरण किया और कहा कि उनकी शिक्षाओं ने न केवल उनके ज्ञान और समझ को समृद्ध किया, बल्कि व्यावसायिक जीवन की सफलता में भी अमूल्य योगदान दिया। उपायुक्त ने कहा कि जीवन में हर नया दिन एक नई चुनौती और अनुभव लेकर आता है, और हर मोड़ पर कोई न कोई ऐसा व्यक्ति अवश्य मिलता है, जो शिक्षक की भूमिका निभाते हुए राह दिखाता है। उन्होंने सभी ऐसे ज्ञात-अज्ञात गुरुओं को नमन करते हुए आभार व्यक्त किया। अपने संदेश के अंत में उन्होंने भावुक होकर कहा, “मुझमें एक अंश आप सबका भी है और मुझे विश्वास है कि मैंने आपकी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में सफलता पाई होगी।”
