द फॉलोअप डेस्क
बिहार के लखीसराय में री-नीट परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आने के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। इस नेटवर्क में गिरिडीह की पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी का नाम सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूनम कुमारी वर्ष 2021 में झारखंड इंटर साइंस परीक्षा की स्टेट टॉपर रह चुकी हैं। एक मेधावी छात्रा का नाम इस मामले में सामने आने के बाद अब पूरे प्रकरण को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लखीसराय पुलिस ने री-नीट परीक्षा के दौरान कुल 30 लोगों को पकड़ा है। इनमें नौ मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल हैं, जिन पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का आरोप है। गिरफ्तार छात्रों में गिरिडीह के बरमसिया गांव की रहने वाली पूनम कुमारी और पलामू के सियरभूका गांव की चंचल कुमारी भी शामिल हैं। पूनम बीएचयू में बीएससी नर्सिंग की छात्रा हैं, जबकि चंचल ओडिशा के बलांगीर गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं।

परिजनों ने जताई हैरानी, बहकावे में आने की आशंका
गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद दोनों परिवारों ने आश्चर्य व्यक्त किया है। पूनम के माता-पिता ने कहा कि उन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं चंचल कुमारी के भाई शंभू कुशवाहा ने बताया कि पुलिस ने फोन कर सूचना दी कि उनकी बहन को दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया है। परिवार का मानना है कि वह किसी के बहकावे में आकर इस मामले में शामिल हुई होगी। मामले में एक और बड़ा सवाल बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। री-नीट परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा ईडीसीआईएल को दिया गया था, लेकिन कंपनी ने यह कार्य आगे इनोवेटिव व्यू कंपनी को सौंप दिया। जानकारी के अनुसार झारखंड, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद संवेदनशील परीक्षा में इसकी भागीदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गैंग का सरगना गिरफ्तार, जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने गैंग के सरगना अर्जुन राज सिंह के अलावा नालंदा के दो भाइयों मनीष और नीतीश को भी गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान दो बायोमेट्रिक मशीनें, तीन सैटेलाइट फोन और परीक्षा कार्य में लगे 14 स्टाफ को भी पकड़ा गया है। मामले में कबैया और किऊल थाना में केस दर्ज कर जांच जारी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क की पहुंच कहां तक थी और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।