रांची:
राजधानी रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत स्टेडियम से आयोजित मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमंडल स्तरीय मुखिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि गांव के विकास और ग्राम सभा को सशक्त बनाने की दिशा में ये आयोजन कारगर कदम है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में मुखिया गांव के विकास का मुख्य कड़ी है, जो गांव के विकास का भविष्य को गढ़ने का काम अपने हाथों से कर सकते है। कम शब्दों में कहें तो मुखिया अपने पंचायत के मुख्यमंत्री की तरह हैं। गांव के लोगों को राज्य सरकार के द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने में मुखिया की बड़ी भूमिका है।
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झारखंड के पंचायत डिजिटल पंचायत बन गए
उन्होंने कहा कि राज्य में जीर्णशीर्ण हालात में संचालित पंचायत भवनों को भी जन प्रतिनिधियों ने देखा है, लेकिन आज पंचायती राज विभाग की पहल पर हर माह पंचायतों को 15 हजार रुपए मिल रहे हैं। पंचायत भवनों का रंग रूप बदल गया है, झारखंड के पंचायत डिजिटल पंचायत बन गए हैं। अब किसी मुखिया को अपने पंचायत भवन को स्वच्छ रखने के लिए खुद झाड़ू लगाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार अब पंचायत भवनों के बेहतर संचालन के लिए राशि का भुगतान कर रही है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के पास 15वें वित्त आयोग का पैसा लेने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ा। CM हेमंत सोरेन ने भी केंद्र सरकार के साथ इस बाबत पत्राचार करने का काम किया।
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पहली बार पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार की शुरुआत
15वें वित्त आयोग के तहत टाइड फंड में 412 करोड़ और अन टाइड फंड में 555 करोड़ रुपए पंचायतों को मिल चुका है जबकि टाइड फंड में 410 करोड़ रुपए और अन टाइड फंड 272 करोड़ रुपए बहुत जल्द पंचायतों में जाने वाले है। इतना ही नहीं राज्य वित्त आयोग से भी पंचायतों को 600 करोड़ रुपए मिलने जा रही है। ये राशि गांव के सर्वांगीण विकास के लिए मददगार साबित होंगे। मंत्री ने आगे कहा कि अब तक जो मुखिया योजना के शिलापट पर अपना नाम अंकित कराने में असफल रहें हैं, उनके सामने योजनाओं को धरातल पर उतारने का सुनहरा मौका है। पंचायतों के विकास के लिए राशि की कमी नहीं है बस बेहतर सोच और कल्याणकारी योजना के जरिए विकास के अधूरे सपने को साकार किया जा सकता है। राज्य में पहली बार पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार की शुरुआत इस बात का संकेत है कि आप बेहतर काम कर इस पुरस्कार का हकदार बन सकते है। जो बेहतर काम कर रहे है उन्हें सम्मान मिलना ही चाहिए और सरकार इस सम्मान के साथ उनके मनोबल को बढ़ाने का काम कर रही है।