द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को पत्र लिखकर पुलिस महकमे पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुलिस परिवार के हवाले से यह आरोप लगाया है कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों के यहां नियमों के विपरित पुलिस अंगरक्षक तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई रसूखदार, भू-माफिया और अवैध खनन में लगे कारोबारियों को अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह मामला बहुत गंभीर है और पुलिस का दुरुपयोग है।

मंत्री राधाकृष्ण किशोर की चिट्ठी में क्या लिखा है!
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लिखा कि मैंने इससे पहले 21 अप्रैल को भी सुरक्षाकर्मियों के लिए अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराए जाने की मांग के पीछे मेरी सुरक्षा नहीं, बल्कि सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा का उद्देश्य था। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लिखा है कि अतिरिक्त वाहन की मांग जमीनी हकीकत और तार्किक कारणों के आलोक में है। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उनकी पूर्व में लिखी चिट्ठियों का जवाब नहीं दिया गया, जो पुलिस की खराब कार्य-संस्कृति को दर्शाता है।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर है, यह बात अब सार्वजनिक तौर पर उठने लगी है। पीसीआर और पेट्रोलिंग वाहनों पर केवल एक चालक और एक पुलिस पदाधिकारी जब खुद असुरक्षित हैं, तो दूसरों को क्या सुरक्षा देंगे।
वित्तमंत्री ने पुलिस परिवार के आरोपों का हवाला दिया
वित्त मंत्री ने कहा कि पुलिस परिवार के द्वारा ही यह आरोप लगाया जा रहा है कि कई प्रभावशाली व्यक्तियों के यहां नियमों के विपरित पुलिस अंगरक्षक तैनात हैं। कई रसूखदार, भू-माफिया और अवैध खनन में लगे कारोबारियों को अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया है। यदि आरोप सही हैं तो यह बहुत गंभीर आरोप हैं और ये पुलिस का दुरुपयोग है।

पुलिस की सुरक्षा नीति विफल होने का आरोप लगाया
वित्त मंत्री ने लिखा है कि पुलिस सुरक्षाकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने, उग्रवाद एवं अपराधियों से निपटने और जनता की रक्षा करने के लिए अग्रिम मोर्चे पर तैनात होते हैं। यदि पुलिसकर्मियों को यह आत्मविश्वास होता है कि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा कवर है तो वे दक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। यदि सुरक्षा देने वाले पुलिसकर्मी ही असुरक्षित हों तो वह कानून व्यवस्था स्थापित करने और आम नागरिकों की रक्षा करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस की आधुनिकता के लिए पर्याप्त बजट है, इसके बाद भी राज्य के पुलिसकर्मी यदि अपने को असुरक्षित मानते हैं तो जाहिर है कि पुलिस की सुरक्षा नीति विफल है।
वित्त मंत्री ने आखिरकार लिखा है कि डीजीपी मैडम, अब तो हठधर्मिता छोड़िए और सुरक्षा के पुराने नियमों को बदलिए। अपराध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आम नागरिकों, सुरक्षा खतरों से प्रभावित व्यक्तियों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए नए सिरे से सुरक्षा मानकों को स्थापित कीजिए।