रांची:
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सीएम हेमंत सोरेन से मिलकर जेटेट परीक्षा में अंगिका, संताली, मगही, मैथिली, कुड़माली और कुडुख भाषा को स्थानीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग की है। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि गोड्डा समेत संताल परगना प्रमंडल के बाकी जिलों में भी अंगिका, संताली और कुड़ुख बोलने वालों की बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे परिदृश्य में स्थानीय भाषाओं की सूची में इन्हें भी शामिल किया जायेगा। मंत्री ने कहा कि स्थानीय भाषा के रूप में इन्हें शामिल करने से संताल परगना के स्थानीय नौजवानों के अधिकारों, अवसरों और भागीदारी को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि इस पहल से झारखंड की भाषायी पहचान और सांस्कृतिक सम्मान को सुदृढ़ किया जा सकेगा।

जेटेट नियमावली को कैबिनेट की स्वीकृति नहीं
गौरतलब है कि आज हेमंत कैबिनेट की बैठक में जेटेट नियमावली को स्वीकृति नहीं मिली, जिससे परीक्षा का इंतजार और बढ़ गया है। दरअसल, पिछले दिनों जब संशोधित जेटेट नियमावली आई तो उसमें क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका को स्थानीय भाषा की सूची में जगह नहीं दी गई थी। इसको लेकर कई जिलों से आंदोलन की खबरें भी आई।
पलामू, गढ़वा, चतरा, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा समेत कई जिले हैं, जहां भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषी लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है। इसके अलावा कुड़माली और कुड़ुख को भी स्थानीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग उठी।

2016 में आखिरी बार ली गई थी जेटेट की परीक्षा
झारखंड में वर्ष 2016 में आखिरी बार जेटेट की परीक्षा ली गई थी। झारखंड गठन के बाद पिछले 26 वर्षों में केवल 2 बार शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन हुआ है। अभी करीब साढ़े 4 लाख बीएड-डीएलएड पास अभ्यर्थी जेटेट परीक्षा के इंतजार में हैं ताकि वे इस परीक्षा को पास करके शिक्षक नियुक्ति में आवेदन करने के योग्य बन जाएं। लाखों अभ्यर्थियों ने सीटेट की परीक्षा क्वालीफाई किया है, लेकिन झारखंड सरकार उन्हें शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में हिस्सा लेने नहीं देती। यह मौका केवल जेटेट पास अभ्यर्थियों को मिलता है।
सीटेट पास नौजवानों को मौका नहीं देने और और जेटेट की परीक्षा नहीं होने से नौजवान मुश्किल में हैं।