रांची
आज भाजपाईयो द्वारा राज्यस्तरीय महिला जनाक्रोश मार्च निकालने पर राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल के नाम पर औंधे मुंह गिरे भाजपाइयों को जनाक्रोश मार्च निकलना महज एक ढोंग कर रहे है। यादव ने कहा कि विगत वर्षों 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से सदन में पास हो चुका था और इसे 2029 में लागू किया जाना था। इसके बावजूद 5 राज्यों में चल रहे चुनाव के बीच अफरा तफरी में अचानक संसद का विशेष सत्र बुलाकर पुनः महिला आरक्षण बिल लाकर पास कराने की असंवैधानिक कार्य करने की प्रक्रिया अपनाई गई । जबकि नियमानुसार कोई भी नई विधेयक या संशोधन बिल लाने के पहले विपक्ष को भरोसे में लेकर ड्राफ्ट सौंपे जाते हैं या जेपीसी नहीं हो सलेक्ट कमिटी को भेजे जाते हैं , लेकिन मोदी सरकार इसके विपरीत नियम विरुद्ध सीधे सदन में महिला आरक्षण बिल को पुनः पास करने के नाम पर दो और बिल पीछे की रास्ते से लाने की कोशिश करते हैं ।
बीजेपी की नीयत ठीक नहीं है
यादव ने राजद की ओर से सवाल किया है कि जब महिला आरक्षण बिल 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया तब फिर दुबारा क्यों लाया गया। इसका मतलब स्पष्ट है कि बिल के प्रति बीजेपी की नीयत ठीक नहीं है अगर ऐसा नहीं रहता तो विधेयक को पारदर्शी तरीके से विपक्ष को भरोसे में लेकर ड्राफ्ट सौंपे जाते और सदन में पेश किए गए होते। यादव ने कहा है बिल को लेकर मोदी सरकार बगैर तैयारी की जल्दबाजी में कदम उठाने का काम किया है जबकि पहले जातीय जनगणना होगी तभी परिसीमन कराना संभव हो सकता है लेकिन मोदी सरकार ने ऐसा नहीं किया।
महिला आरक्षण विधेयक पर पारदर्शिता की मांग
नियमानुसार किसी भी बिल को लेकर गृहमंत्री अमित शाह द्वारा सदन में लिखित वादे देने चाहिए जबकि महिला आरक्षण बिल लाकर दो और बिल लेकर लाए जिसकी जानकारी किसी भी विपक्षी दलों को नहीं मिली थी। जिस कारण विपक्ष के सांसदों ने विरोध दर्ज कर विधेयक को बहुमत से दूर रखा। विदित इस विधेयक के संदर्भ में गृहमंत्री अमित शाह सदन में मौखिक वादा कर कहा कि हर राज्यों में डेढ़ गुना सीटें बढ़ाएंगे और राज्यों में नई परिसीमन के तहत सीटे कम नहीं होगी लेकिन विपक्ष नियम संगत सदन में लिखित आशावान की मांग करता रहा और भरोसा में लेकर विधेयक लाने की बात है जिसपर गृहमंत्री अमित शाह ने राजी नहीं हुए। यही कारण है कि विपक्षी दलों को भाजपा पर भरोसा नहीं हुआ और असंवैधानिक बिल को समर्थन नहीं किया।
जातीय जनगणना और परिसीमन पर सियासी टकराव
यादव ने कहा है कि पहले जातीय जनगणना तब परिसीमन लागू करना जरूरी होगा और अगर समय रहते ऐसा नहीं हुआ तब 2029 के बजाय 2034 में परिसीमन की प्रक्रिया बढ़ जाएगी क्योंकि नई परिसीमन कार्यों में लगभग 3 वर्ष समय लग सकता है। आज झारखंड की राजधानी रांची में भाजपा द्वारा महिला जनाक्रोश मार्च निकलना गया जो महज एक नाटक था ,बीजेपी के तमाम बड़े पुरुष नेता मंच पर थे और विषय वस्तु से अनभिज्ञ महिलाएं कड़ी धूप में सड़क पर नारा लगा रही थी ।यही भाजपाइयों का चाल चरित्र चेहरा है ।भाजपा कभी महिलाओं की हितैषी नहीं हो सकती क्योंकि बीजेपी के सर्वोच्च नेताओं से लेकर अनेक स्थानीय नेताओं के दामन पर दाग लगे हुए हैं जबतक दाग से पाक साफ नहीं हो जाते तब तक भाजपा महिला हितैषी नहीं हो सकती ये सिर्फ महिला आरक्षण बिल के नाम पर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। इसलिए जनाक्रोश मार्च सिर्फ नाटक है।