द फॉलोअप डेस्क
सिमडेगा उपायुक्त कंचन सिंह की अध्यक्षता में आदिवासी संस्कृति एवं कला केन्द्र/धुमकुड़िया भवनों में पारम्परिक वाद्ययंत्रों की आपूर्ति हेतु जिला स्तरीय क्रय समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पूर्व में दिनांक 28 नवंबर 2025 को संपन्न बैठक के आलोक में आज दिनांक 7 जनवरी को आयोजित की गई, जिसमें वाद्ययंत्रों की दर एवं क्रय प्रक्रिया पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, पलाश झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी (जेएसएलपीएस) सिमडेगा द्वारा पत्रांक JSLPS/DMMU/SIM/ADM/359/2025 दिनांक 13.12.2025 के माध्यम से उराँव मांदर एवं उराँव नगाड़ा की दर समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई। समिति द्वारा उराँव मांदर (लंबाई 24.5 इंच) की दर ₹5000 तथा उराँव नगाड़ा (20×22 इंच) की दर ₹8000 को अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके साथ ही इन्हीं दरों पर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आपूर्ति आदेश जारी करने की सहमति दी गई।.jpeg)
शेष आठ पारंपरिक वाद्ययंत्र- ढोल, पिटा घट, करताल, घुँघरू (जोड़ा), झुनझुना, शहनाई, बाँसुरी एवं थेचका- को जेम पोर्टल के माध्यम से क्रय करने का निर्णय लिया गया। परियोजना निदेशक, आईटीडीए सिमडेगा ने बताया कि जिले के 111 पूर्ण धुमकुड़िया भवनों में तत्काल पारंपरिक वाद्ययंत्रों की आपूर्ति की जानी है। इस संबंध में जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जेएसएलपीएस सिमडेगा को आवश्यक कार्यदिशा निर्गत करने का निर्णय लिया गया। .jpg)
बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र भगत ने मांदर बजाकर उसकी ध्वनि गुणवत्ता की जांच की, और उसके पश्चात समिति से क्रय पर सहमति बनी। बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए सरोज तिर्की, जेएसएलपीएस डीपीएम शांति मार्डीं सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।