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जन गण मन से पहले वंदे मातरम का गायन अनिवार्य किया जाना धर्मनिरपेक्षता के अनुकूल नहींः हेमलाल मुर्मू

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द फॉलोअप डेस्क
राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने गुरुवार को सदन में वंदेमातरम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अब राष्ट्र गान जन गण मन से पहले राष्ट्रीय गीत वंदेमातरण को अनिवार्य प्रोटोकॉल में शामिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत को सबसे पहले 1911 में कोलकाता में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। बाद में इस पर बहस हुई। क्योंकि मुसलिम विद्वानों के अनुसार राष्ट्रीय गीत में देवी दुर्गा की चर्चा है और यह मुसलिम धर्म के एकेश्वरवाद के विरुद्ध बताया। मुसलिम लीग की मांग पर इसके अंतिम चार छंद हटा दिए गए। अब न सिर्फ इसके गायन को अनिवार्य किया गया है बल्कि उन चार छंदों को जोड़ भी दिया गया है। हालांकि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मुसलिम लीग की मांग पर नहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता वाली कमेटी ने देश के धर्म निरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखने के उद्देश्य से राष्ट्रीय गीत के गायन को स्थगित करने का निर्णय लिया। क्योंकि इसमें सांप्रदायिकता की बू आती है। लेकिन बीच में खड़ी हुई भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि गजब का तर्क है। राष्ट्रीय गीत में सांप्रदायिकता की बू दिखायी पड़ रही है। बच्चे आज डिप्रेशन में जा रहे हैं। इस गीत से बच्चे डिप्रेशन से बचेंगे। चर्चा में भाग लेते हुए झामुमो विधायक उमाकांत रजक ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। अभिभाषण के औचित्य को सही बताया।


बहाली तेज हो, मुसलिमों की समस्याओं का समाधान, उम्र सीमा में छूट और जेटेटे की जल्द हो परीक्षाः प्रदीप यादव
हेमलाल मुर्मू ने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड को अस्त व्यस्त करने में लगी है। कभी एनसीआर तो कभी सीएसआईआर तो कभी बंग्लादेशी घुसपैठ के माध्यम से। उन्होंने यहां तक कहा कि जब सामने के दरवाजे से ये नहीं प्रवेश कर रहे तो दूसरे दरवाजे से आना चाहते हैं। प्रदीप यादव ने विपक्ष की ओर से अभिभाषण पर कोई संशोधन नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संसदीय व्यवस्था में ऐसा विरले होता है। शायद विपक्ष भी मान रहा है अभिभाषण में डपोरशंखी घोषणा नहीं है। उन्होंने केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण को नहीं पढ़े जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान में कितना विश्वास करती है, इसी से स्पष्ट होता है। तीनों राज्यों के राज्यपाल को बर्खास्त किया जाना चाहिए। जबकि पीएम और गृहमंत्री चुप बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के कारण वृद्धावस्था पेंशनधारियों को चार माह से पैसा नहीं मिला है। पिछले वर्ष केंद्र से 17057 करोड़ की राशि मिलनी थी, मात्र 7086 करोड़ मिली। झारखंड किस विपरीत परिस्थिति में चल रहा है, इसे समझने की जरुरत है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार को बहाली तेज करने, मुसलिमों की समस्याओं का समाधान करने, जेपीएससी के अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट तथा जेटेट की नौ वर्षो से लंबित परीक्षा का तत्काल आयोजन कराने की सरकार को नसीहत भी दी। 

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