द फॉलोअप डेस्क
लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र में अंतिम संस्कार को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद पुलिस की सूझबूझ और मानवीय पहल से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया। पारही डांड़ी टोली निवासी एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजन श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अलौदी गांव के कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का मानना था कि दूसरे गांव का शव उनके क्षेत्र के श्मशान घाट में जलाने से गांव में भूत-प्रेत का प्रकोप बढ़ सकता है। इस अंधविश्वास के कारण विवाद इतना बढ़ गया कि मृतक का शव दो दिनों तक घर में ही पड़ा रहा और अंतिम संस्कार नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार, मृतक के परिजन लगातार अंतिम संस्कार कराने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन विरोध के कारण उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी। दोनों गांवों के लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। मामले की सूचना मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और सेन्हा थाना प्रभारी नीरज झा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत शुरू की।
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पुलिस ने समझाइश से खत्म कराया विवाद
थाना प्रभारी नीरज झा ने ग्रामीणों को समझाया कि अंधविश्वास के आधार पर किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार में बाधा डालना न केवल सामाजिक रूप से अनुचित है, बल्कि यह कानून के भी विरुद्ध है। उन्होंने दोनों पक्षों से धैर्यपूर्वक बातचीत की और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। लंबे संवाद और समझाइश के बाद दोनों गांवों के लोगों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद विवाद समाप्त हो गया और अंतिम संस्कार कराने का रास्ता साफ हो गया। मामला सुलझने के बाद थाना प्रभारी नीरज झा ने सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाकर खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मानवता का परिचय देते हुए स्वयं शव को कंधा दिया। वे ग्रामीणों के साथ श्मशान घाट तक गए और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी इस संवेदनशील पहल ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ।

'अंतिम संस्कार में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए'
सेन्हा थाना प्रभारी नीरज झा ने बताया कि शव के दाह संस्कार को लेकर दो गांवों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाया गया, जिसके बाद मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील और मानवीय कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में थाना प्रभारी की सराहना हो रही है और लोग इसे पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली का उदाहरण बता रहे हैं।