द फॉलोअप, रांची
कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने पार्टी द्वारा दिए गए शोकॉज का आज जवाब दे दिया। 28 पन्नों में उन्होंने अपना जवाब दिया है। इसे उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को सौंपा है। सूत्रों के अनुसार अपने जवाब में उन्होंने सिलसिलेवार बताया कि सरकार जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनती है। कब कब उन्होंने कौन सी मांग और सुझाव सरकार को दिया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस परिस्थिति में कोई भी जनप्रतिनिधि क्या करे। क्योंकि जनप्रतिनिधि होने के कारण जनता की समस्याओं का हल कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अनुशासन तोड़ने में विश्वास नहीं करते हैं। उन्होंने अपने जवाब से पार्टी को भी सोचने को मजबूर कर दिया है। क्योंकि पार्टी को अब यह फैसला करना है कि उसकी पार्टी के सिपाहियों की बात अगर नहीं मानी जा रही है तो राज्य में संगठन का विस्तार कैसे होगा।

मालूम हो कि पिछले दिनों डालटेनगंज में हुए एक प्रेस कंफ्रेंस में केएन त्रिपाठी ने राज्य में कानून व्यवस्था का सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री इतने व्यस्त हैं तो उन्हें गृह विभाग की जिम्मेदारी कैबिनेट के किसी अन्य सक्षम मंत्री को दे देना चाहिए। उनके इस बयान को कांग्रेस ने गठबंधन सरकार की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए स्पष्टीकरण पूछा था। यहां मालूम हो को पांच अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र से पूर्व विधायक दल की बैठक है। उसके बाद महागठबंधन के विधायकों की भी दूसरी बैठक है। इसमें प्रदेश प्रभारी के राजू विशेष रूप से शामिल रहेंगे। इन बैठकों में केएन त्रिपाठी को उपस्थित नहीं रहेंगे, लेकिन उनके जवाब पर चर्चा से इंकार नहीं किया जा रहा है। इन बैठकों को देखते हुए ही उन्होंने आज स्पष्टीकरण दिया है।
