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करम महोत्सव में संस्कृति और अधिकार की गूंज, कुड़मी समाज ने ST सूची में शामिल करने की मांग दोहराई

करम महोत्सव में संस्कृति और अधिकार की गूंज, कुड़मी समाज ने ST सूची में शामिल करने की मांग दोहराई

जमशेदपुर
जमशेदपुर के गोपाल मैदान में रविवार को करम की आस्था के साथ कुड़मी समाज की संस्कृति, पहचान और अधिकार का सवाल भी मुखर हुआ। करम गीत, झूमर और पारंपरिक नृत्य से सजे इस आयोजन में संस्कृति के संरक्षण के साथ समाज की पहचान और अधिकार का सवाल भी साथ-साथ दिखायी दिया।कुड़मी सेना के करम महोत्सव में बिहार के ग्रामीण विकास एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने आधुनिकता के दौर में अपनी लोक परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया, वहीं कुड़मी सेना के केंद्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने केंद्र सरकार से कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग दोहराई। महोत्सव में करम पर्व की परंपरा और लोक संस्कृति के रंग के बीच बड़ी संख्या में लोग जुटे। जहां करम महोत्सव सिर्फ पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा। बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और लोक संस्कृति को बचाए रखने का संदेश दिया गया। 

कंप्यूटर और तकनीक के दौर में भले समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है

बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कंप्यूटर और तकनीक के दौर में भले समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास की इस यात्रा में अपनी जड़ों और संस्कृति को भूलना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी जड़ों से कट जाता है, वह अपनी पहचान खो देता है। श्रवण कुमार ने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली परंपरा है। आधुनिक तकनीक और विकास के बीच भी प्रकृति और लोक संस्कृति का महत्व कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी परंपरा, माटी और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कुड़मी सेना के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से पारंपरिक धरोहर को आगे बढ़ाने के साथ युवाओं को अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।

समाज के एसटी दर्जे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा

महोत्सव के मंच से कुड़मी समाज के एसटी दर्जे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। केंद्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने कहा कि करम महोत्सव का उद्देश्य समाज को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से एक मंच पर लाने के साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना भी है। उन्होंने केंद्र सरकार से कुड़मी समाज को एसटी सूची में अविलंब शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि इस मांग को लेकर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में समाज पूर्व में रेल टेका आंदोलन कर चुका है। समाज लंबे समय से अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। करम महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे आयोजन को लोक रंग में रंग दिया। ओडिशा के बारीपदा से पहुंचीं झूमर गायिका सुलोचना देवी और उनकी टीम ने पारंपरिक झूमर गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा। इस दौरान कुड़मी गीतों पर दर्शक भी झूमते नजर आये। गुलशन महंता, पोमी महंता, अमूल्य महाता, सुष्मिता बारिक और तापस बिंधानी की प्रस्तुतियों ने लोक संस्कृति के रंग को और गहरा किया। 

तीन विभूतियों को कुड़मी रत्न सम्मान दिया गया

इसके अलावा महोत्सव के दौरान समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली तीन विभूतियों को कुड़मी रत्न सम्मान दिया गया। पूर्वी सिंहभूम के समाजसेवी डॉ. सनत महतो उर्फ रतन महतो, चक्रधरपुर के मधुसूदन महतो और राजनगर के बसंत महतो को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में विशाल महतो, प्रबीर महतो, सूरज महतो, कार्तिक महतो, नीलांबर महतो, विष्णु देव महतो, गौरांगो महतो, प्रेम महतो, जगतपति महतो, दिवाकर महतो, प्रशांत महतो, जयप्रकाश महतो, दीनबंधु महतो, किशोर महतो, मनोज महतो, अजय महतो और भवेश महतो समेत अन्य लोगों की भूमिका रही।

Tags - Karam Mahotsav Kudmi Community ST Status Jamshedpur Folk Culture